28 सितंबर 2026 को, जम्मू-कश्मीर विधानसभा ने पूर्ण राज्य का दर्जा तत्काल बहाल करने की मांग वाला एक प्रस्ताव पारित किया। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला द्वारा पेश किए गए इस प्रस्ताव को भाजपा विधायकों के विरोध और सदन से वॉकआउट के बीच ध्वनि मत से पारित किया गया।
🔑 मुख्य बिंदु
- प्रस्तावक: मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला
- पारित होने का तरीका: भाजपा के विरोध के बावजूद ध्वनि मत से
- दायरा: केवल पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग
- बहिष्करण: अनुच्छेद 370 और 35A का कोई उल्लेख नहीं किया गया, ताकि प्रस्ताव को विवाद में पड़ने से बचाया जा सके।
- समर्थन: नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC), कांग्रेस, CPI(M), PDP, JKPC, AAP और AIP ने समर्थन किया।
- विरोध: भाजपा विधायकों ने विरोध किया, कागज फाड़े और सदन से वॉकआउट किया।
📜 ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
- 1954–2019: जम्मू-कश्मीर को अनुच्छेद 370 और 35A के तहत विशेष दर्जा प्राप्त था।
- अगस्त 2019: संसद ने अनुच्छेद 370 को निरस्त कर दिया। जम्मू-कश्मीर को विधानसभा वाले केंद्र शासित प्रदेश में बदल दिया गया, जबकि लद्दाख को बिना विधानसभा वाले अलग केंद्र शासित प्रदेश के रूप में बनाया गया।
- 2000: जम्मू-कश्मीर विधानसभा ने फारूक अब्दुल्ला सरकार के दौरान अधिक स्वायत्तता की मांग वाला प्रस्ताव पारित किया था।
- 2024: विधानसभा ने विशेष दर्जे की बहाली की मांग वाला प्रस्ताव पारित किया।
- सुप्रीम कोर्ट (2023–24): न्यायालय ने निर्देश दिया कि चुनावों के बाद राज्य का दर्जा “यथाशीघ्र” बहाल किया जाए।
- 2026: वर्तमान प्रस्ताव का ध्यान केवल राज्य का दर्जा बहाल करने पर है, जिससे अनुच्छेद 370 के मुद्दे को दोबारा उठाए बिना एक रणनीतिक कदम उठाया गया है।




