झारखंड के पारंपरिक लोक ताल वाद्य यंत्र मांदर को सितंबर 2026 में भौगोलिक संकेतक (GI) टैग प्राप्त हुआ, जो इसकी विशिष्ट शिल्पकला और राज्य की जनजातीय संस्कृति से इसके गहरे संबंध को मान्यता देता है।
मुख्य बिंदु
- वाद्य यंत्र: झारखंड का पारंपरिक ताल/ढोल वाद्य यंत्र।
- समुदाय: छोटानागपुर क्षेत्र के उरांव समुदाय से इसका घनिष्ठ संबंध है।
- विशेषता: इसके एक हिस्से को स्थानीय लाल मिट्टी से बनाया जाता है, जिससे इसे विशिष्ट गहरी और गूंजदार ध्वनि मिलती है।
- उपयोग: झूमर, सरहुल तथा अन्य जनजातीय त्योहारों और सामुदायिक समारोहों में बजाया जाता है।
- GI रजिस्ट्री: भौगोलिक संकेतक रजिस्ट्री, चेन्नई।
- आवेदन: 2021 में रायडीह मांदर प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड, गुमला द्वारा दायर किया गया।
- आवेदन संख्या: 777
- महत्व: यह वाद्य यंत्र की प्रामाणिकता की रक्षा करता है, स्थानीय कारीगरों को समर्थन देता है, जनजातीय विरासत को संरक्षित करता है और झारखंड की सांस्कृतिक पहचान को बढ़ावा देता है।




