बकरीद 2026: ईद-उल-अज़हा क्यों मनाई जाती है?

ईद-उल-अज़हा (बकरीद), जो सबसे महत्वपूर्ण इस्लामी त्योहारों में से एक है, भारत के अधिकांश हिस्सों में 28 मई 2026 को मनाया जा रहा है, जबकि जम्मू और कश्मीर में इसे स्थानीय चांद दिखने के कारण 27 मई 2026 को मनाया गया। भारत सरकार ने 28 मई 2026 को आधिकारिक राजपत्रित अवकाश घोषित किया, जिसके चलते बैंक, स्कूल और कार्यालय बंद रहे।

यह त्योहार पैगंबर इब्राहिम की भक्ति और आज्ञाकारिता की याद दिलाता है; वे अल्लाह में अपनी आस्था के प्रतीक के रूप में अपने बेटे इस्माइल की कुर्बानी देने को तैयार थे। इस्लामी परंपरा के अनुसार, अल्लाह ने उस कुर्बानी को एक मेमने से बदल दिया, जो दया और अटूट विश्वास का प्रतीक है। ईद-उल-अज़हा मक्का में होने वाली वार्षिक हज यात्रा के समापन का भी प्रतीक है।

इस त्योहार के मुख्य अनुष्ठानों में मस्जिदों और ईदगाहों में विशेष ईद की नमाज़ अदा करना और उसके बाद उपदेश (खुत्बा) सुनना शामिल है। मुसलमान कुर्बानी (जानवर की कुर्बानी) देते हैं और उसका मांस परिवार, रिश्तेदारों और गरीबों के बीच बांटते हैं, जो दान और करुणा के महत्व को दर्शाता है। परिवार बिरयानी, कबाब, कोरमा और शीर खुरमा जैसे पारंपरिक व्यंजनों के साथ इस त्योहार का जश्न मनाते हैं।

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