शेरों के संरक्षण के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए हर साल 10 अगस्त को ‘वर्ल्ड लायन डे’ मनाया जाता है। 2026 में, भारत ने एशियाई शेरों के सफल संरक्षण को उजागर किया।
स्थापना: 2013 में संरक्षणवादी डेरेक और बेवर्ली जौबर्ट द्वारा।
वैज्ञानिक नाम: पैंथेरा लियो (Panthera leo)।
भारत में एशियाई शेरों की आबादी: 2015 में 523 से बढ़कर 2025 में 891 हो गई।
आबादी में बढ़ोतरी: एक दशक में लगभग 70%।
आवास का विस्तार: लगभग 30,000 वर्ग किमी (2020) से बढ़कर लगभग 35,000 वर्ग किमी (2025) तक।
आवास: एशियाई शेर गुजरात में, खासकर गिर इलाके में पाए जाते हैं।
प्रोजेक्ट लायन: आवास में सुधार, बीमारियों की निगरानी और समुदाय की भागीदारी के लिए 2020 में शुरू किया गया।
मुख्य खतरे: आवास का नुकसान और बंटवारा, शिकार की कमी, अवैध शिकार और इंसान-वन्यजीव संघर्ष।
IUCN स्थिति: वल्नरेबल (खतरे की आशंका वाली प्रजाति)।
भारतीय नौसेना और अमेरिकी नौसेना ने 10-14 अगस्त 2026 तक कोच्चि के सदर्न नेवल कमांड में ‘एक्सप्लोसिव ऑर्डनेंस डिस्पोजल’ (EOD) अभ्यास 2026 का आठवां संस्करण शुरू किया है। पांच दिन तक चलने वाले इस द्विपक्षीय अभ्यास में दोनों नौसेनाओं की स्पेशलिस्ट डाइविंग और EOD टीमें शामिल हैं।
यह अभ्यास पानी के नीचे विस्फोटक खतरों, साल्वेज ऑपरेशन (मलबा हटाने या डूबे हुए जहाज को निकालने का काम), आधुनिक EOD तरीकों, नई तकनीकों और बेहतरीन तौर-तरीकों पर केंद्रित है। इसमें विषय-विशेषज्ञों का आदान-प्रदान (SMEEs), क्रॉस-ट्रेनिंग, उपकरणों का प्रदर्शन और हालात पर आधारित प्रैक्टिकल अभ्यास जैसी गतिविधियां शामिल हैं।
भारत और अमेरिका 2005 से संयुक्त साल्वेज और EOD अभ्यास करते आ रहे हैं। 2026 के इस अभ्यास का मकसद आपसी तालमेल (interoperability), पेशेवर सहयोग और संयुक्त ऑपरेशनल क्षमताओं को बेहतर बनाना है, साथ ही भारत-अमेरिका रक्षा साझेदारी को और मजबूत करना है।
परीक्षा के लिए उपयोगी जानकारी: संयुक्त समुद्री EOD क्षमताओं और आपसी तालमेल को बेहतर बनाने के लिए भारत-अमेरिका EOD अभ्यास 2026 (आठवां संस्करण) 10-14 अगस्त 2026 तक कोच्चि के सदर्न नेवल कमांड में आयोजित किया जा रहा है।
भारत ने 31 जुलाई 2026 तक 300.50 GW की स्थापित गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित बिजली उत्पादन क्षमता का ऐतिहासिक आंकड़ा पार कर लिया है। इसके साथ भारत ने 2030 तक 500 GW के लक्ष्य का 60% से अधिक हासिल कर लिया है। अब गैर-जीवाश्म स्रोत भारत की कुल स्थापित विद्युत क्षमता का 54% से अधिक हिस्सा हैं।
स्रोत के अनुसार क्षमता:
☀️ सौर ऊर्जा: 164.59 GW
🌬️ पवन ऊर्जा: 58.14 GW
💧 जल विद्युत: 57.24 GW
🌱 बायो-पावर: 11.75 GW
⚛️ परमाणु ऊर्जा: 8.78 GW
कुल: 300.50 GW
2025–26 के दौरान भारत ने रिकॉर्ड 55.29 GW गैर-जीवाश्म ऊर्जा क्षमता जोड़ी, जिसमें 44.6 GW सौर ऊर्जा और 6 GW पवन ऊर्जा शामिल है।
नवीकरणीय बिजली उत्पादन 2014–15 में 190.96 बिलियन यूनिट से बढ़कर 2025–26 में 477.79 बिलियन यूनिट हो गया।
✅ एक-पंक्ति त्वरित पुनरावृत्ति एवं अतिरिक्त तथ्य
भारत ने 31 जुलाई 2026 को 300 GW गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित क्षमता का आंकड़ा पार किया।
🎯 2030 तक लक्ष्य: 500 GW गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित स्थापित क्षमता।
☀️ भारत का पहला सोलर पार्क: चारणका सोलर पार्क, गुजरात (2012)।
☀️ सबसे बड़ा सोलर प्रोजेक्ट: भड़ला सोलर पार्क, राजस्थान — 2.25 GW।
🌍 COP28 प्रतिबद्धता: भारत ने 2070 तक नेट-जीरो उत्सर्जन का लक्ष्य रखा है।
🚆 हाइड्रोजन ट्रेन पायलट परियोजना: जींद–सोनीपत सेक्शन, हरियाणा (2026)।
भारत सरकार ने साफ़ किया है कि नागरिकों के लिए UPI पेमेंट मुफ़्त रहेंगे। पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स (PSS) एक्ट, 2007 में हालिया बदलाव का मकसद भारत के UPI इकोसिस्टम की लंबे समय तक चलने की क्षमता, तकनीकी तरक्की और मज़बूती को सुनिश्चित करना है।
यूज़र्स के लिए कोई चार्ज नहीं: नागरिकों को UPI पेमेंट के लिए ट्रांज़ैक्शन चार्ज नहीं देना होगा।
मर्चेंट्स के लिए MDR: अगर भविष्य में इसे लागू किया जाता है, तो मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) सिर्फ़ तय सीमा से ज़्यादा वाले कुछ खास मर्चेंट ट्रांज़ैक्शन पर और मामूली दर पर लागू होगा।
ज़्यादातर मर्चेंट ट्रांज़ैक्शन मुफ़्त रहेंगे: MDR सभी UPI मर्चेंट ट्रांज़ैक्शन पर लगने वाला कोई आम चार्ज नहीं होगा।
MDR पर फ़ैसला: संसद द्वारा टैक्सेशन एंड अदर लॉज़ (अमेंडमेंट) बिल, 2026 पास होने के बाद, NPCI की अगुवाई वाली UPI और सर्विसेज़ स्टीयरिंग कमिटी यह तय करेगी कि MDR लागू किया जाए या नहीं।
बदलाव की वजह: इस कदम का मकसद UPI के बढ़ते इंफ़्रास्ट्रक्चर, साइबर सिक्योरिटी, धोखाधड़ी से बचाव, तकनीकी अपग्रेड और वित्तीय स्थिरता को सपोर्ट करना है।
UPI की ग्रोथ: जुलाई 2026 में, UPI ने ₹29.9 लाख करोड़ के 2,366 करोड़ ट्रांज़ैक्शन प्रोसेस किए।
ग्लोबल पहुँच: UPI अब 11 विदेशी देशों में चालू है और दुनिया के सबसे बड़े रियल-टाइम पेमेंट सिस्टम के तौर पर उभरा है।
UPI की पृष्ठभूमि: NPCI द्वारा विकसित और 2016 में लॉन्च किया गया UPI, मोबाइल नंबर, VPA और QR कोड के ज़रिए तुरंत इंटरऑपरेबल पेमेंट की सुविधा देता है।
भारतीय शतरंज ग्रैंडमास्टर आर. प्रज्ञानानंद ने USA के सेंट लुइस चेस क्लब में 31 जुलाई से 7 अगस्त 2026 तक आयोजित सेंट लुइस रैपिड एंड ब्लिट्ज़ 2026 टूर्नामेंट में अपना पहला खिताब जीता।
उन्होंने 35 में से 23.5 अंक हासिल किए और उज़्बेकिस्तान के जावोखिर सिंदारोव से 1.5 अंक आगे रहे। USA के वेस्ली सो 20.5 अंकों के साथ तीसरे स्थान पर रहे। प्रज्ञानानंद ने $50,000 और 13 ग्रैंड चेस टूर अंक जीते, जिससे वे ओवरऑल ग्रैंड चेस टूर स्टैंडिंग में दूसरे स्थान पर पहुँच गए।
यह जीत इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि प्रज्ञानानंद ने इसी साल नॉर्वे चेस 2026 भी जीता था।
हर साल 7 अगस्त को ‘राष्ट्रीय हथकरघा दिवस’ (National Handloom Day) मनाया जाता है। यह दिन 1905 के स्वदेशी आंदोलन की याद में मनाया जाता है, जिसने देश में बने उत्पादों को बढ़ावा दिया और विदेशी सामानों का बहिष्कार किया। 2026 में, 12वां राष्ट्रीय हथकरघा दिवस नई दिल्ली के राष्ट्रपति भवन सांस्कृतिक केंद्र में मनाया गया, जिसमें राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू मुख्य अतिथि थीं।
2026 के समारोह में हथकरघा क्षेत्र में इनोवेशन, सस्टेनेबिलिटी और टेक्नोलॉजी पर ज़ोर दिया गया। बेहतरीन काम करने वाले बुनकरों को 3 ‘संत कबीर हथकरघा पुरस्कार’ और 19 ‘राष्ट्रीय हथकरघा पुरस्कार’ दिए गए। भारत की हथकरघा परंपराओं को दिखाने वाले चार यादगार डाक टिकट और प्रकाशन भी जारी किए गए।
हथकरघा क्षेत्र 35 लाख से ज़्यादा बुनकरों और उनसे जुड़े कामगारों को रोज़गार देता है, जिनमें से 72% महिलाएं हैं। यह ग्रामीण रोज़गार और महिलाओं के नेतृत्व वाले आर्थिक सशक्तिकरण का एक अहम ज़रिया है। बनारसी सिल्क, कांजीवरम, महेश्वरी, कोटा डोरिया और खादी जैसे पारंपरिक कपड़े भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को दर्शाते हैं।
परीक्षा के लिए ज़रूरी बातें:
राष्ट्रीय हथकरघा दिवस: 7 अगस्त
संबंधित घटना: स्वदेशी आंदोलन, 1905
पहली बार मनाया गया: 2015
2026 संस्करण: 12वां
मुख्य अतिथि: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू
स्थान: राष्ट्रपति भवन सांस्कृतिक केंद्र, नई दिल्ली
सरकार ने संसद को बताया कि भारत के गगनयान मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम ने काफी प्रगति की है। इसके तहत, बिना क्रू (यात्री) वाला पहला एक्सपेरिमेंटल मिशन 2026 की चौथी तिमाही (Q4) के लिए और क्रू वाला पहला मिशन 2027 के लिए तय किया गया है।
बिना क्रू वाला पहला एक्सपेरिमेंटल मिशन: Q4 2026, जिसमें ‘व्योममित्र’ (एक हाफ-ह्यूमनॉइड रोबोट) भी शामिल होगा।
गगनयान का पहला क्रू वाला मिशन: 2027 के लिए तय।
क्रू वाली पहली उड़ान से पहले दो और बिना क्रू वाले मिशन की योजना है।
ह्यूमन-रेटेड लॉन्च व्हीकल (HLVM3) के प्रोपल्शन स्टेज और स्ट्रक्चर का डेवलपमेंट और ग्राउंड टेस्टिंग पूरी हो चुकी है।
क्रू एस्केप सिस्टम के कई बड़े सफल टेस्ट किए गए हैं, और टेस्ट व्हीकल मिशन TV-D1 ने क्रू-एस्केप टेक्नोलॉजी को सफलतापूर्वक टेस्ट किया है।
चुने गए गगनयात्रियों ने रूस में जेनेरिक स्पेसफ्लाइट ट्रेनिंग पूरी कर ली है और बेंगलुरु में मिशन-स्पेसिफिक ट्रेनिंग ले रहे हैं।
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने सितंबर 2024 में आठ गगनयान मिशनों के लिए ₹20,193 करोड़ की मंज़ूरी दी।
भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन (BAS) के 2035 तक चालू होने का लक्ष्य है और इसमें पांच मॉड्यूल होंगे।
भारत इस कार्यक्रम के अलग-अलग पहलुओं के लिए ESA, ऑस्ट्रेलिया, फ्रांस और रूस के साथ सहयोग कर रहा है।
मुख्य बातें: 🚀 गगनयान का पहला बिना क्रू वाला मिशन → Q4 2026 👨🚀 पहला क्रू वाला मिशन → 2027 🛰️ भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन → 2035 💰 गगनयान के लिए आवंटन → ₹20,193 करोड़
5 अगस्त 2026 को संसद ने ‘सुप्रीम कोर्ट (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन विधेयक, 2026’ पास किया। इसके तहत भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) को छोड़कर सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों की स्वीकृत संख्या 33 से बढ़ाकर 37 कर दी गई है।
यह संशोधन ‘सुप्रीम कोर्ट (न्यायाधीशों की संख्या) अधिनियम, 1956’ में बदलाव करता है।
न्यायाधीशों की संख्या में यह बढ़ोतरी पहले ही मई 2026 में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा जारी एक अध्यादेश के ज़रिए की जा चुकी थी।
सरकार ने कहा कि इस कदम का मकसद सुप्रीम कोर्ट की कार्यक्षमता को बेहतर बनाना और समय पर न्याय सुनिश्चित करना है।
केंद्रीय कानून और न्याय राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने व्यापक न्यायिक सुधारों के हिस्से के तौर पर इस कदम का बचाव किया।
उसी दिन, लोकसभा ने ‘बैंकर्स बुक्स एविडेंस बिल, 2026’ भी पास किया। इसका मकसद बैंकिंग रिकॉर्ड और डिजिटल बैंकिंग सबूतों से जुड़े नियमों को आधुनिक बनाना है।
परीक्षा के लिए ज़रूरी तथ्य: सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश (CJI को छोड़कर) → 37।
4 अगस्त 2026 को, भारत के झंडे वाला कार्गो जहाज़ MSV फ़ैज़ नूर ओलिय्या, यमन के पास लाल सागर में एक प्रोजेक्टाइल/विस्फोटक से लदी नाव की टक्कर के बाद डूब गया। यमनी कोस्ट गार्ड ने सभी 14 क्रू सदस्यों (जिनमें 13 भारतीय और एक यमनी नागरिक शामिल थे) को सुरक्षित बचा लिया और मोखा बंदरगाह पहुँचाया।
मुख्य बातें:
जहाज़: MSV फ़ैज़ नूर ओलिय्या — भारत के झंडे वाला मशीनीकृत सेलिंग वेसल (पाल वाला जहाज़)।
तारीख: 4 अगस्त 2026।
जगह: लाल सागर, यमन के पश्चिमी तट के पास।
क्रू: 14 सदस्य, जिनमें 13 भारतीय शामिल थे।
हताहत: कोई नहीं; सभी क्रू सदस्यों को बचा लिया गया।
भारत की प्रतिक्रिया: विदेश मंत्रालय (MEA) ने इस हमले की निंदा करते हुए इसे “बिना उकसावे के” किया गया हमला बताया और अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों में स्वतंत्र और निर्बाध आवाजाही की मांग की।
बचाव कार्य: यमनी कोस्ट गार्ड ने क्रू सदस्यों को बचाया और उन्हें मोखा बंदरगाह पहुँचाया।
यह हमला रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण लाल सागर शिपिंग रूट पर समुद्री सुरक्षा के लगातार बने हुए खतरों को उजागर करता है।
परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण: MSV फ़ैज़ नूर ओलिय्या — भारत के झंडे वाला जहाज़ — लाल सागर — यमन — 4 अगस्त 2026 — 14 क्रू सदस्यों में से 13 भारतीयों को बचाया गया।
राज्यसभा से मंज़ूरी मिलने के बाद, संसद ने 4 अगस्त 2026 को ‘जन्म और मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक, 2026’ पारित किया; लोकसभा इसे पहले ही पारित कर चुकी थी। यह विधेयक ‘जन्म और मृत्यु पंजीकरण अधिनियम, 1969’ में संशोधन करता है और इसका मकसद समय पर और सही पंजीकरण को बढ़ावा देते हुए, देर से होने वाले पंजीकरण के नियमों को और सख्त बनाना है।
मुख्य प्रावधान:
1–2 साल की देरी: एक साल के बाद लेकिन दो साल के भीतर बताई गई जन्म या मृत्यु के पंजीकरण के लिए, सत्यापन के बाद ज़िला मजिस्ट्रेट, उप-विभागीय मजिस्ट्रेट या अधिकृत कार्यकारी मजिस्ट्रेट की मंज़ूरी की ज़रूरत होगी।
2 साल से ज़्यादा की देरी: पंजीकरण के लिए प्रथम श्रेणी के न्यायिक मजिस्ट्रेट के आदेश की ज़रूरत होगी।
इस संशोधन का मकसद गलत तरीके से देर से पंजीकरण के ज़रिए होने वाले दुरुपयोग, हेरफेर और पहचान से जुड़ी धोखाधड़ी को रोकना है।
इसका मकसद जन्म और मृत्यु का सार्वभौमिक और सही पंजीकरण सुनिश्चित करना और नागरिक रिकॉर्ड की विश्वसनीयता को बेहतर बनाना है।
भारत में लगभग 3.5 लाख पंजीकरण इकाइयाँ हैं।
जन्म पंजीकरण 2014 में 86.6% से बढ़कर 2024 में 99% से ज़्यादा हो गया।
इसी अवधि में मृत्यु पंजीकरण 72.5% से बढ़कर 99.4% हो गया।
विधेयक का समर्थन करने वाले सदस्यों ने कानूनी पहचान, शासन, नीति-निर्माण और सार्वजनिक सेवाओं की डिलीवरी के लिए पंजीकरण के महत्व पर ज़ोर दिया।
कुछ सदस्यों ने चिंता जताई कि दो साल बाद मामलों को न्यायिक मजिस्ट्रेट के पास भेजने से पहले से ही बोझ तले दबे न्यायालयों पर काम का बोझ और बढ़ सकता है।
परीक्षा के लिए ज़रूरी बात: यह विधेयक मुख्य रूप से जन्म और मृत्यु के देर से पंजीकरण की प्रक्रिया को मज़बूत करता है, खासकर घटना के दो साल बाद किए जाने वाले पंजीकरण के मामले में।
राजस्थान की 19 साल की साइक्लिस्ट हर्षिता जाखड़, ‘टूर डी फ्रांस फेम्स’ में हिस्सा लेने वाली पहली भारतीय महिला बनीं। उन्होंने 2 अगस्त 2026 को स्विट्जरलैंड में स्टेज 2 की औपचारिक शुरुआत में भाग लिया।
हर्षिता उन आठ साइक्लिस्ट के खास तौर पर चुने गए ग्रुप का हिस्सा थीं, जो अफ़गानिस्तान, अल्जीरिया, चिली, इथियोपिया, नामीबिया और युगांडा जैसे देशों से आए थे।
इन राइडर्स को UCI (यूनियन साइक्लिस्ट इंटरनेशनल) ने चुना था और उन्होंने कोर्स के 4.5 किलोमीटर के न्यूट्रलाइज़्ड सेक्शन को पूरा किया।
‘टूर डी फ्रांस फेम्स’, पुरुषों के ‘टूर डी फ्रांस’ का महिला संस्करण है और यह UCI महिला वर्ल्ड टूर कैलेंडर का हिस्सा है।
2026 की रेस 1 अगस्त को लॉज़ेन में शुरू हुई और 9 अगस्त को नीस में खत्म होने वाली है।
हर्षिता ने भारत में जूनियर और सीनियर साइक्लिंग प्रतियोगिताओं में कई सफलताएँ हासिल की हैं।
उनका लक्ष्य 2026 एशियाई खेलों में टॉप 10 में जगह बनाना और 2030 एशियाई खेलों में मेडल जीतना है।
परीक्षा के लिए ज़रूरी बात: हर्षिता जाखड़ → टूर डी फ्रांस फेम्स में पहली भारतीय महिला → राजस्थान → 2026।
एयर मार्शल तेजपाल सिंह AVSM VM ने 1 अगस्त 2026 को डिप्टी चीफ ऑफ एयर स्टाफ (DCAS) का पद संभाला।
मुख्य बातें
नए डिप्टी चीफ ऑफ एयर स्टाफ: एयर मार्शल तेजपाल सिंह
पद संभाला: 1 अगस्त 2026
वे 16 जून 1990 को भारतीय वायु सेना में फाइटर पायलट के तौर पर शामिल हुए थे।
उन्हें 3,500 घंटे से ज़्यादा की उड़ान का अनुभव है।
वे कैटेगरी A क्वालिफाइड फ्लाइंग इंस्ट्रक्टर और एक्सपेरिमेंटल टेस्ट पायलट हैं।
उन्होंने भारतीय वायु सेना में कई महत्वपूर्ण ऑपरेशनल, कमांड और स्टाफ पदों पर काम किया है।
उन्हें 2011 में वायु सेना मेडल (VM) से सम्मानित किया गया था।
उन्हें 2021 में अति विशिष्ट सेवा मेडल (AVSM) मिला।
उन्होंने एयर मार्शल अवधेश कुमार भारती की जगह ली, जो 39 साल की सेवा के बाद 31 जुलाई 2026 को रिटायर हुए थे।
परीक्षा के लिए ज़रूरी बात: एयर मार्शल तेजपाल सिंह भारतीय वायु सेना के नए डिप्टी चीफ ऑफ एयर स्टाफ (DCAS) हैं, और यह नियुक्ति 1 अगस्त 2026 से लागू हुई है।
वाइस एडमिरल एएन प्रमोद, AVSM, YSM ने 1 अगस्त 2026 को डिप्टी चीफ ऑफ नेवल स्टाफ (DCNS) का पद संभाला। उन्होंने वाइस एडमिरल तरुण सोबती की जगह ली है, जो 38 साल से ज़्यादा की शानदार सेवा के बाद 31 जुलाई 2026 को रिटायर हुए थे।
वाइस एडमिरल प्रमोद 1 जुलाई 1990 को भारतीय नौसेना में शामिल हुए थे और उन्होंने कमांड, ऑपरेशनल, इंस्ट्रक्शनल और स्टाफ जैसे कई पदों पर 36 साल से ज़्यादा समय तक सेवा की है।
मुख्य बातें
नए डिप्टी चीफ ऑफ नेवल स्टाफ: वाइस एडमिरल एएन प्रमोद
पद संभाला: 1 अगस्त 2026
भारतीय नौसेना में शामिल हुए: 1 जुलाई 1990
अनुभव: 36 साल से ज़्यादा की सेवा
वे CAT ‘A’ सी किंग एयर ऑपरेशन्स ऑफिसर और कम्युनिकेशन और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर स्पेशलिस्ट हैं।
वे डिफेंस सर्विसेज स्टाफ कॉलेज, वेलिंगटन और नेवल हायर कमांड कोर्स, नेवल वॉर कॉलेज, गोवा के पूर्व छात्र हैं।
उन्होंने INS अभय, INS शार्दुल और INS सतपुड़ा सहित कई महत्वपूर्ण नौसैनिक जहाजों की कमान संभाली है।
उन्होंने ऑपरेशन विजय (1999) और ऑपरेशन पराक्रम (2001) में हिस्सा लिया।
उन्होंने 13 दिसंबर 2023 से 31 जुलाई 2026 तक डायरेक्टर जनरल नेवल ऑपरेशन्स (DGNO) के तौर पर सेवा की।
DGNO के तौर पर, वे ऑपरेशन सिंदूर के दौरान प्लानिंग और ऑपरेशनल तैयारी और पश्चिम एशिया संकट के दौरान समुद्री सुरक्षा ऑपरेशन्स में शामिल थे।
उन्हें 2024 में अति विशिष्ट सेवा मेडल (AVSM) और 2025 में युद्ध सेवा मेडल (YSM) से सम्मानित किया गया।
उन्होंने वाइस एडमिरल तरुण सोबती की जगह ली है, जो 31 जुलाई 2026 को रिटायर हुए थे।
परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण बिंदु
वाइस एडमिरल एएन प्रमोद नए डिप्टी चीफ ऑफ नेवल स्टाफ (DCNS) हैं, जो 1 अगस्त 2026 से प्रभावी है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2 अगस्त 2026 को ‘नशा मुक्त युवा फॉर विकसित भारत संकल्प अभियान’ की शुरुआत की। इस अभियान का मकसद युवाओं को नशीले पदार्थों के सेवन से दूर रहने के लिए प्रोत्साहित करना और एक स्वस्थ, आत्मविश्वासी और जिम्मेदार युवा आबादी को बढ़ावा देकर नशा-मुक्त भारत बनाना है।
28,000 से ज़्यादा जगहों से 1 करोड़ से ज़्यादा युवा नागरिक इस लॉन्च में शामिल हुए और नशा-विरोधी शपथ ली। यह अभियान 100 हफ़्तों तक चलेगा, जिसमें हर रविवार को गतिविधियाँ आयोजित की जाएँगी।
मुख्य बातें
शुरुआत: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा
लॉन्च की तारीख: 2 अगस्त 2026
अभियान: नशा मुक्त युवा फॉर विकसित भारत संकल्प अभियान
मुख्य उद्देश्य: भारत के युवाओं को नशीले पदार्थों के सेवन से मुक्त करना।
100-हफ़्ते का प्लान: यह अभियान 100 हफ़्तों तक चलेगा, जिसमें हर रविवार को गतिविधियाँ होंगी।
भागीदारी: 28,000 से ज़्यादा जगहों से 1 करोड़ से ज़्यादा युवा लॉन्च में शामिल हुए।
यह अभियान पिछले साल काशी (वाराणसी) में शुरू किए गए एक पायलट प्रोजेक्ट से आगे बढ़ा है।
इस पहल को काशी घोषणा के तहत 125 से ज़्यादा आध्यात्मिक संगठनों और कई NGO का समर्थन प्राप्त है।
MY Bharat युवाओं को इस अभियान से जोड़ने में अहम भूमिका निभा रहा है।
MY Bharat ने देश भर में 2.23 करोड़ से ज़्यादा युवाओं को जोड़ा है।
100 हफ़्तों के दौरान होने वाली गतिविधियों में कला, संस्कृति, खेल और ध्यान शामिल होंगे।
प्रधानमंत्री ने स्कूलों, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों से नशीले पदार्थों के हानिकारक प्रभावों के बारे में जागरूकता फैलाने का आग्रह किया।
यह अभियान नशे की लत से उबर रहे लोगों के पुनर्वास और उन्हें समाज में स्वीकार्यता दिलाने पर भी ध्यान केंद्रित करता है।
प्रधानमंत्री ने ज़ोर दिया कि नशे की लत से उबर रहे लोगों को सम्मान, समर्थन और दूसरा मौका दिया जाना चाहिए।
डॉ. मनसुख मंडाविया ने कहा कि यह अभियान देशव्यापी जन-भागीदारी आंदोलन बन जाएगा।
राष्ट्रमंडल खेल 2026 का आयोजन 23 जुलाई से 2 अगस्त 2026 तक ग्लास्गो, स्कॉटलैंड में हुआ। भारत ने इन खेलों में अपने सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शनों में से एक करते हुए 39 पदक जीते और पदक तालिका में चौथा स्थान प्राप्त किया।
भारत ने 13 स्वर्ण, 17 रजत और 9 कांस्य पदक जीते। मुक्केबाजी भारत के लिए सबसे सफल खेल रही, जबकि भारोत्तोलन, एथलेटिक्स, पैरा-एथलेटिक्स और जूडो में भी कई ऐतिहासिक उपलब्धियाँ हासिल हुईं।
भारत का पदक प्रदर्शन
🥇 स्वर्ण: 13
🥈 रजत: 17
🥉 कांस्य: 9
🏅 कुल पदक: 39
समग्र रैंक: चौथा (4th)
प्रमुख उपलब्धियाँ
मुक्केबाजी: भारतीय मुक्केबाजों ने रिकॉर्ड 10 पदक, जिनमें 7 स्वर्ण पदक शामिल हैं, जीतकर राष्ट्रमंडल खेलों में भारत का अब तक का सर्वश्रेष्ठ मुक्केबाजी प्रदर्शन किया।
मीराबाई चानू: महिलाओं की 48 किलोग्राम भारोत्तोलन स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतकर राष्ट्रमंडल खेलों में लगातार तीसरी बार स्वर्ण जीतने (हैट्रिक) का रिकॉर्ड बनाया।
जूडो:अस्मिता डे ने राष्ट्रमंडल खेलों में जूडो में भारत का पहला स्वर्ण पदक जीता। हर्ष सिंह राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण जीतने वाले पहले भारतीय पुरुष जूडोका बने।
पैरा-एथलेटिक्स:शर्मिला ढांकर ने राष्ट्रमंडल खेलों में पैरा-एथलेटिक्स में भारत का पहला स्वर्ण पदक जीता।
दिलीप गावित: पुरुषों की 100 मीटर T47 स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीता।
सोमन राणा: पुरुषों की F57 शॉट पुट स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीता।
नीरज चोपड़ा: पुरुषों की भाला फेंक स्पर्धा में अपने सत्र का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए रजत पदक जीता।
गुलवीर सिंह:10,000 मीटर में रजत तथा 5,000 मीटर में कांस्य पदक जीतकर एक ही राष्ट्रमंडल खेलों में एथलेटिक्स में दो पदक जीतने वाले पहले भारतीय बने।
तेजस्विन शंकर:डेकाथलॉन में कांस्य पदक जीतकर राष्ट्रमंडल खेलों में डेकाथलॉन पदक जीतने वाले पहले भारतीय बने।
झांडू कुमार:पैरा पावरलिफ्टिंग में पदक जीतकर भारत के लिए राष्ट्रमंडल खेल 2026 का पहला पदक हासिल किया।
पदक तालिका में शीर्ष देश
रैंक
देश
स्वर्ण
रजत
कांस्य
कुल
1
ऑस्ट्रेलिया
65
41
52
158
2
इंग्लैंड
26
40
35
101
3
कनाडा
18
20
21
59
4
भारत
13
17
9
39
5
स्कॉटलैंड
13
8
17
38
समग्र महत्व
भारत का प्रदर्शन इसलिए भी विशेष रहा क्योंकि उसके कई पारंपरिक मजबूत खेल, जैसे कुश्ती, बैडमिंटन, निशानेबाजी और हॉकी, इस बार राष्ट्रमंडल खेलों का हिस्सा नहीं थे। इसके बावजूद भारतीय खिलाड़ियों ने मुक्केबाजी, भारोत्तोलन, एथलेटिक्स, पैरा-एथलेटिक्स और जूडो में शानदार प्रदर्शन किया।
भारत के 39 पदकों और चौथे स्थान ने यह दर्शाया कि देश अब पारंपरिक खेलों के अलावा अनेक अन्य खेलों में भी लगातार मजबूत प्रदर्शन कर रहा है।
31 जुलाई 2026 को, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 2026–27 से 2030–31 तक प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (PM-KISAN) योजना को जारी रखने की मंज़ूरी दी, जिसके लिए ₹3.15 लाख करोड़ का वित्तीय आवंटन किया गया है।
मुख्य बातें
योजना: प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (PM-KISAN)
शुरुआत: फरवरी 2019
नई अवधि: 2026–27 से 2030–31
वित्तीय आवंटन: ₹3.15 लाख करोड़
सालाना सहायता: पात्र किसान परिवार को ₹6,000
डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के ज़रिए तीन बराबर किस्तों में भुगतान।
पारदर्शी वितरण के लिए आधार-आधारित ऑथेंटिकेशन और डिजिटल वेरिफिकेशन का इस्तेमाल।
प्रमुख उपलब्धियां
23 किस्तों के ज़रिए किसानों को ₹4.47 लाख करोड़ से ज़्यादा की राशि ट्रांसफर की गई।
23वीं किस्त के तहत, 9.49 करोड़ से ज़्यादा किसानों को ₹18,984 करोड़ से ज़्यादा की राशि मिली।
कोविड-19 महामारी के दौरान ₹1.71 लाख करोड़ से ज़्यादा की राशि बांटी गई।
महिला लाभार्थियों को ₹1.06 लाख करोड़ से ज़्यादा की राशि मिली है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 31 जुलाई 2026 को ‘समुद्र मंथन’ राष्ट्रीय अपतटीय (ऑफशोर) अन्वेषण योजना को मंज़ूरी दी। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के तहत आने वाली इस केंद्रीय क्षेत्र की योजना का बजट ₹84,084 करोड़ है और इसे वित्त वर्ष 2030-31 तक लागू किया जाएगा।
इस योजना का मकसद अपतटीय तेल और गैस की खोज में तेज़ी लाना, घरेलू उत्पादन बढ़ाना, भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मज़बूत करना और अपस्ट्रीम ऊर्जा क्षेत्र में आधुनिक तकनीकों को बढ़ावा देना है।
सरकार को उम्मीद है कि इस योजना से भारत के भंडार में 600 मिलियन मीट्रिक टन तेल के बराबर (MMTOE) से ज़्यादा की बढ़ोतरी होगी और अपतटीय खोज तथा घरेलू कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस के उत्पादन का बड़े पैमाने पर विस्तार होगा।
मुख्य विशेषताएं
बजट: ₹84,084 करोड़
कार्यान्वयन: वित्त वर्ष 2030-31 तक
फ़ोकस: अपतटीय तेल और प्राकृतिक गैस की खोज
उच्च-गुणवत्ता वाले भूकंपीय (सिस्मिक) डेटा का बड़े पैमाने पर अधिग्रहण और प्रोसेसिंग
गहरे पानी और बहुत गहरे पानी (अल्ट्रा-डीपवॉटर) में तेज़ी से ड्रिलिंग
फ्रंटियर बेसिन में वैज्ञानिक ड्रिलिंग
साझा अपतटीय उत्पादन और निकासी बुनियादी ढांचे का विकास
एकीकृत तेल और गैस विनिर्माण और सेवा क्षेत्र की स्थापना
डिजिटल कार्यक्रम प्रबंधन, क्षमता निर्माण और तकनीक को अपनाना
अंतर्राष्ट्रीय सहयोग और हितधारकों की भागीदारी को बढ़ावा देना
NAKSHA का मतलब है ‘नेशनल जियोस्पेशियल नॉलेज-बेस्ड लैंड सर्वे ऑफ़ अर्बन हैबिटेशन्स’ (शहरी बस्तियों का राष्ट्रीय जियोस्पेशियल ज्ञान-आधारित भूमि सर्वेक्षण)। यह ग्रामीण विकास मंत्रालय के भूमि संसाधन विभाग (DoLR) का एक पायलट प्रोग्राम है, जिसका मकसद एडवांस्ड जियोस्पेशियल टेक्नोलॉजी के ज़रिए शहरी भूमि रिकॉर्ड को आधुनिक बनाना है।
NAKSHA पायलट प्रोग्राम 19 फरवरी 2025 को मध्य प्रदेश के रायसेन में शुरू किया गया था। इसमें 27 राज्यों और 3 केंद्र शासित प्रदेशों के 157 शहरी स्थानीय निकाय (ULB) शामिल हैं।
NAKSHA की मुख्य विशेषताएं
ड्रोन-बेस्ड मैपिंग: शहरी इलाकों की हाई-रिज़ॉल्यूशन एरियल इमेज लेने और प्रॉपर्टी की सीमाओं की सही पहचान करने के लिए ड्रोन का इस्तेमाल किया जाता है।
GIS टेक्नोलॉजी: डिजिटल भूमि के नक्शे बनाने और उन्हें मैनेज करने के लिए ज्योग्राफिक इंफॉर्मेशन सिस्टम (GIS) का इस्तेमाल किया जाता है।
CORS: लगातार काम करने वाले रेफरेंस स्टेशन (CORS) भूमि सर्वेक्षण के लिए बहुत सटीक पोज़िशनिंग हासिल करने में मदद करते हैं।
ULPIN: ज़मीन के हर टुकड़े (पार्सल) को 14-अंकों का यूनिक लैंड पार्सल आइडेंटिफिकेशन नंबर (ULPIN) दिया जा सकता है, जिसे ‘भू-आधार’ भी कहा जाता है।
डिजिटल भूमि रिकॉर्ड: इस प्रोजेक्ट का मकसद शहरी ज़मीन के टुकड़ों के सटीक और छेड़छाड़-रोधी डिजिटल रिकॉर्ड बनाना है।
NAKSHA के उद्देश्य
इसके मुख्य उद्देश्य हैं:
प्रॉपर्टी और सीमा से जुड़े विवादों को कम करना।
शहरी भूमि के मालिकाना हक में पारदर्शिता लाना।
शहरी योजना और बुनियादी ढांचे के विकास के लिए सटीक भूमि डेटा उपलब्ध कराना।
डिजिटल भूमि रिकॉर्ड की विश्वसनीयता को मज़बूत करना।
शहरी प्रशासन को बेहतर बनाने और राजस्व के नुकसान को कम करने में मदद करना।
गोवा में NAKSHA – 2026
गोवा में, NAKSHA पायलट के तहत सार्वजनिक सत्यापन/पूछताछ की प्रक्रिया 16 जुलाई से 14 अगस्त 2026 तक चल रही है।
इस प्रक्रिया में मडगांव, कुनकोलिम और पणजी शामिल हैं। प्रॉपर्टी के मालिक अपनी प्रॉपर्टी की मैप्ड जानकारी की जांच करने और ज़रूरत पड़ने पर आपत्तियां उठाने या सुधार बताने के लिए सत्यापन प्रक्रिया में हिस्सा ले सकते हैं।
30 जुलाई 2026 को, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा की कि ‘बोर्ड ऑफ़ पीस’ ने गाज़ा में हमास और अन्य हथियारबंद समूहों के पूरी तरह से हथियार छोड़ने (निरस्त्रीकरण) के लिए एक समझौते पर सहमति बना ली है। हमास के एक वरिष्ठ अधिकारी ने भी इस योजना पर सहमति की पुष्टि की है और जल्द ही एक आधिकारिक बयान आने की उम्मीद है, जबकि इज़राइल ने अभी तक इस पर कोई टिप्पणी नहीं की है।
ट्रंप ने कहा कि यह समझौता गाज़ा में एक नई फ़िलिस्तीनी सरकार के लिए रास्ता बना सकता है जो ‘बोर्ड ऑफ़ पीस’ के साथ मिलकर काम करेगी, साथ ही इज़राइल की सुरक्षा सुनिश्चित करेगी और गाज़ा का इस्तेमाल हमलों के लिए होने से रोकेगी। इज़राइल लंबे समय से शांति समझौते की शर्त के तौर पर हमास के पूरी तरह से हथियार छोड़ने और सैन्य ताकत खत्म करने की मांग करता रहा है।
यह घोषणा ऐसे समय में हुई है जब इज़राइल गाज़ा में अपने सैन्य अभियान और नियंत्रण का विस्तार कर रहा है; प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू का कहना है कि इज़राइल का इरादा उस इलाके के लगभग 70% हिस्से पर नियंत्रण करने का है।
गाज़ा संघर्ष – संक्षिप्त इतिहास
1948: इज़राइल के बनने के बाद, पहले अरब-इज़राइली युद्ध के कारण लाखों फ़िलिस्तीनी विस्थापित हुए; इस घटना को फ़िलिस्तीनी ‘नक्बा’ कहते हैं।
1967: ‘छह-दिवसीय युद्ध’ (Six-Day War) के दौरान इज़राइल ने गाज़ा, वेस्ट बैंक और पूर्वी यरूशलेम पर कब्ज़ा कर लिया।
1987: पहला ‘इंतिफ़ादा’ (विद्रोह) शुरू हुआ और इसी विद्रोह के दौरान हमास की स्थापना हुई।
1993–95: ओस्लो समझौतों (Oslo Accords) ने फ़िलिस्तीनी अथॉरिटी बनाई और फ़िलिस्तीनियों के स्व-शासन के लिए एक ढांचा तैयार किया।
2005: इज़राइल ने गाज़ा से अपने बसने वालों (settlers) और स्थायी ज़मीनी सेना को हटा लिया।
2006–07: हमास ने फ़िलिस्तीनी विधायी चुनाव जीता और बाद में 2007 में फ़तह (Fatah) के साथ संघर्ष के बाद गाज़ा पर नियंत्रण कर लिया।
2008–2021: इज़राइल और हमास के बीच संघर्ष के कई बड़े दौर चले, जिनमें बार-बार रॉकेट हमले, इज़राइली सैन्य अभियान और युद्धविराम शामिल थे।
7 अक्टूबर 2023: हमास के नेतृत्व वाले उग्रवादियों ने दक्षिणी इज़राइल पर हमला किया, जिसमें लगभग 1,200 लोग मारे गए और कई लोगों को बंधक बना लिया गया। इसके जवाब में इज़राइल ने गाज़ा में बड़े पैमाने पर सैन्य अभियान चलाया।
2023–2026: इस युद्ध के कारण गाज़ा में भारी तबाही हुई और गंभीर मानवीय संकट पैदा हो गया, जबकि बातचीत मुख्य रूप से बंधकों, युद्धविराम, मानवीय सहायता और हमास के निरस्त्रीकरण पर केंद्रित रही।
30 जुलाई 2026: ट्रंप ने हमास और अन्य सशस्त्र समूहों के पूरी तरह से निशस्त्रीकरण के लिए एक समझौते की घोषणा की, जिससे गाजा में एक नई फिलिस्तीनी सरकार और शांति के लिए एक व्यापक व्यवस्था का रास्ता खुल सकता है।
कांवड़ यात्रा 2026 की शुरुआत आज, 30 जुलाई 2026 को पवित्र श्रावण (सावन) महीने के साथ हो रही है। लाखों कांवड़िए हरिद्वार, गौमुख, गंगोत्री और सुल्तानगंज जैसे तीर्थ स्थलों से पवित्र गंगाजल लाएंगे और उसे उत्तर भारत के शिव मंदिरों में ले जाएंगे। यह यात्रा 11 अगस्त 2026 को सावन शिवरात्रि पर मुख्य जलाभिषेक के साथ संपन्न होगी।
कांवड़ यात्रा का गहरा ऐतिहासिक और पौराणिक महत्व है। हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार, भक्त भगवान शिव को गंगाजल अर्पित करते हैं ताकि समुद्र मंथन के दौरान उनके द्वारा ग्रहण किए गए घातक हलाहल विष से उनके गले को शीतलता मिल सके। एक अन्य मान्यता इस परंपरा की शुरुआत रावण से जोड़ती है, जिनके बारे में माना जाता है कि वे देवघर स्थित बैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग तक गंगाजल ले गए थे। यह परंपरा मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, बिहार, झारखंड, हरियाणा और दिल्ली में मनाई जाती है।
लोकसभा ने 30 जुलाई 2026 को ‘सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026’ पारित किया, ताकि पेपर लीक और परीक्षा में गड़बड़ी के खिलाफ कार्रवाई को और मज़बूत किया जा सके।
इस संशोधन में दोषी पाए जाने पर 10 साल तक की जेल, ₹10 करोड़ तक का जुर्माना और दोषियों की संपत्ति ज़ब्त करने का प्रावधान है। साथ ही, इसमें हर राज्य और केंद्र शासित प्रदेश के लिए पेपर लीक मामलों की रोज़ाना सुनवाई के लिए स्पेशल फास्ट-ट्रैक कोर्ट बनाने की भी बात कही गई है। राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि इस संशोधन का मकसद कानून को और सख़्त बनाना और जल्द न्याय सुनिश्चित करना है।
भारत और नेपाल ने जुलाई 2026 में कोलकाता पोर्ट से नेपाल के विराटनगर कस्टम्स यार्ड तक पहली सीधी कमर्शियल कंटेनर फ्रेट ट्रेन सर्विस शुरू की है। कैनोला ले जाने वाली यह 40-वैगन वाली ट्रेन, संशोधित भारत-नेपाल रेल ट्रांजिट प्रोटोकॉल के तहत चलाई गई। इस नई सर्विस से कंटेनर कार्गो को बॉर्डर पर बिना ट्रांसशिपमेंट के सीधे रेल से ले जाया जा सकता है, जिससे ट्रांजिट का समय, लॉजिस्टिक्स लागत और कार्गो हैंडलिंग में कमी आती है और दोनों देशों के बीच व्यापार बेहतर होता है।
महत्वपूर्ण बातें:
पहली सीधी फ्रेट ट्रेन: कोलकाता पोर्ट (भारत) → विराटनगर कस्टम्स यार्ड (नेपाल)
ट्रेन की जानकारी: कैनोला ले जाने वाले 40 वैगन।
प्रोटोकॉल: संशोधित भारत-नेपाल रेल ट्रांजिट प्रोटोकॉल के तहत संचालित।
मुख्य विशेषता: बॉर्डर पर बिना ट्रांसशिपमेंट के सीधी रेल आवाजाही।
इस्तेमाल किया गया रेल लिंक: जोगबनी (भारत) – विराटनगर (नेपाल) ब्रॉड-गेज रेल लिंक।
रेल लिंक का उद्घाटन: जून 2023 में पीएम नरेंद्र मोदी और नेपाल के तत्कालीन प्रधानमंत्री द्वारा।
संशोधित लेटर ऑफ एक्सचेंज (LoE): नवंबर 2025 में साइन किया गया, जिससे सीधे कमर्शियल ऑपरेशन संभव हुआ।
फायदे:
ट्रांजिट समय और लॉजिस्टिक्स लागत को कम करता है।
कार्गो हैंडलिंग और सप्लाई चेन की दक्षता में सुधार करता है।
तेज़, सस्ता और पर्यावरण के अनुकूल ट्रांसपोर्टेशन को बढ़ावा देता है।
भारत-नेपाल व्यापार और आर्थिक सहयोग को मजबूत करता है।
महत्व: अंतरराष्ट्रीय रेल कनेक्टिविटी और क्षेत्रीय व्यापार को बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा कदम।
भारत ने प्रभावित इलाकों में मोबाइल फोन पर तुरंत आपदा की चेतावनी भेजने के लिए 2 मई 2026 को ‘सेल ब्रॉडकास्ट अलर्ट सिस्टम’ (CBS) लॉन्च किया। यह सिस्टम ‘नेशनल डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी’ (NDMA) द्वारा ‘कॉमन अलर्टिंग प्रोटोकॉल’ (CAP) के ज़रिए चलाया जाता है और इसे ‘डिपार्टमेंट ऑफ़ टेलीकम्युनिकेशन्स’ (DoT) के तहत C-DOT ने विकसित किया है। यह तेज़ी से लोकेशन-आधारित अलर्ट भेजता है ताकि लोग समय पर कदम उठा सकें और आपदा के दौरान जान-माल का नुकसान कम हो सके।
ज़रूरी बातें:
लॉन्च की तारीख: 2 मई 2026
किसने विकसित किया: डिपार्टमेंट ऑफ़ टेलीकम्युनिकेशन्स (DoT) के तहत C-DOT ने
किसने लागू किया: नेशनल डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी (NDMA)
किस पर आधारित: कॉमन अलर्टिंग प्रोटोकॉल (CAP)
किसके साथ जुड़ा है: SACHET (भारत का CAP-आधारित अलर्ट प्लेटफ़ॉर्म)
कवरेज: सभी 36 राज्य और केंद्र शासित प्रदेश
पाँच चेतावनी एजेंसियां:
भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD)
केंद्रीय जल आयोग (CWC)
इंडियन नेशनल सेंटर फॉर ओशन इंफॉर्मेशन सर्विसेज़ (INCOIS)
वर्ल्ड हेपेटाइटिस डे हर साल 28 जुलाई को वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइज़ेशन (WHO) द्वारा मनाया जाता है। इसका मकसद वायरल हेपेटाइटिस के बारे में जागरूकता बढ़ाना है, जो एक बड़ी ग्लोबल हेल्थ चुनौती है और इससे लिवर कैंसर और सिरोसिस हो सकता है। 2026 की थीम है “हेपेटाइटिस: लेट्स ब्रेक इट डाउन” (Hepatitis: Let’s Break It Down), जिसमें टेस्टिंग, इलाज और रोकथाम में आने वाली रुकावटों को दूर करने पर ध्यान दिया जाएगा।
🌍 हेपेटाइटिस क्या है?
परिभाषा: हेपेटाइटिस का मतलब है लिवर में सूजन। यह वायरस, शराब के सेवन, ज़हरीले पदार्थों या ऑटोइम्यून स्थितियों के कारण हो सकता है।
वायरल हेपेटाइटिस के प्रकार:
हेपेटाइटिस A और E: मुख्य रूप से दूषित भोजन और पानी से फैलते हैं। आमतौर पर ये एक्यूट (अचानक होने वाले) होते हैं और अपने आप ठीक हो जाते हैं।
हेपेटाइटिस B, C और D: खून, यौन संपर्क या माँ से बच्चे में फैलने से होते हैं। ये क्रॉनिक (लंबे समय तक रहने वाले) संक्रमण बन सकते हैं, जिससे सिरोसिस और लिवर कैंसर हो सकता है।
📊 ग्लोबल बोझ (WHO का डेटा)
हेपेटाइटिस B: दुनिया भर में लगभग 29.6 करोड़ (296 मिलियन) लोग क्रॉनिक संक्रमण के साथ जी रहे हैं।
हेपेटाइटिस C: लगभग 5.8 करोड़ (58 मिलियन) लोग क्रॉनिक संक्रमण के साथ जी रहे हैं।
हेपेटाइटिस B और C मिलकर हर साल 10 लाख (1 मिलियन) से ज़्यादा लोगों की मौत का कारण बनते हैं, जिनमें से ज़्यादातर मौतें लिवर कैंसर और सिरोसिस से होती हैं।
📌 वर्ल्ड हेपेटाइटिस डे 2026 की मुख्य बातें
थीम: “हेपेटाइटिस: लेट्स ब्रेक इट डाउन” – बातचीत को आसान बनाना, भेदभाव (स्टिग्मा) से लड़ना और इलाज तक पहुँच को बढ़ावा देना।
तारीख: 28 जुलाई (डॉ. बारूक ब्लमबर्ग का जन्मदिन, जिन्होंने हेपेटाइटिस B वायरस की खोज की थी और इसकी वैक्सीन बनाई थी)।
ग्लोबल इवेंट्स: WHO और सरकारें दुनिया भर में कैंपेन, स्क्रीनिंग और जागरूकता अभियान चला रही हैं, जिसमें बीमारी को खत्म करने की कोशिशों को तेज़ करने के लिए ब्राज़ील में हाई-लेवल मीटिंग्स भी शामिल हैं।
सेंट्रल रिज़र्व पुलिस फ़ोर्स (CRPF) का 87वां स्थापना दिवस 27 जुलाई 2026 को मनाया गया। 1939 में ‘क्राउन रिप्रेजेंटेटिव्स पुलिस’ के तौर पर इसकी स्थापना के बाद से अब इसके 87 साल पूरे हो गए हैं।
📌 87वें स्थापना दिवस से जुड़ी मुख्य बातें
स्थापना: 27 जुलाई 1939 (‘क्राउन रिप्रेजेंटेटिव्स पुलिस’ के रूप में); 1949 में CRPF एक्ट के तहत इसका नाम बदलकर CRPF किया गया।
सबसे बड़ा सेंट्रल आर्म्ड पुलिस फ़ोर्स (CAPF): पूरे भारत में 3,25,000 से ज़्यादा जवान।
मुख्य काम:
जम्मू-कश्मीर और पूर्वोत्तर में उग्रवाद-विरोधी ऑपरेशन।
मध्य भारत में नक्सल-विरोधी ऑपरेशन।
अपनी रैपिड एक्शन फ़ोर्स (RAF) के ज़रिए दंगे और भीड़ को नियंत्रित करना।
बड़े राष्ट्रीय कार्यक्रमों और तीर्थयात्राओं के लिए सुरक्षा।
उत्तर प्रदेश में स्थित प्राचीन बौद्ध स्थल सारनाथ को आधिकारिक तौर पर 25 जुलाई 2026 को दक्षिण कोरिया के बुसान में आयोजित विश्व धरोहर समिति के 48वें सत्र के दौरान UNESCO की विश्व धरोहर सूची में शामिल किया गया। इसके साथ ही यह भारत का 45वां विश्व धरोहर स्थल बन गया। यह मान्यता सारनाथ के वैश्विक महत्व को रेखांकित करती है, क्योंकि यही वह स्थान है जहाँ भगवान बुद्ध ने ज्ञान प्राप्ति के बाद अपना पहला उपदेश दिया था।
📜 सारनाथ के UNESCO में शामिल होने से जुड़ी मुख्य बातें
शामिल होने की तारीख: 25 जुलाई 2026
कार्यक्रम: UNESCO विश्व धरोहर समिति का 48वां सत्र, बुसान, दक्षिण कोरिया
भारत की कुल संख्या: 45 विश्व धरोहर स्थल (37 सांस्कृतिक, 7 प्राकृतिक, 1 मिश्रित)
क्रमबद्ध संपत्ति के घटक:
चौखंडी स्तूप
सारनाथ के पुरातात्विक अवशेष (धमेख स्तूप, धर्मराजिका स्तूप, मूलगंधकुटी विहार, अशोक स्तंभ, आदि)
🏛 ऐतिहासिक और आध्यात्मिक महत्व
बुद्ध का पहला उपदेश: इसे ‘धर्मचक्र प्रवर्तन’ (“धर्म के पहिये का घूमना”) के रूप में जाना जाता है; यह छठी शताब्दी ईसा पूर्व में दिया गया था।
पवित्र भूगोल: बौद्ध ग्रंथों में इसे ऋषिपत्तन, इसीपत्तन या मृगदाव (हिरण पार्क) के रूप में जाना जाता है।
राष्ट्रीय प्रतीक: सारनाथ में खोजा गया अशोक का ‘लायन कैपिटल’ (सिंह शीर्ष) भारत का राष्ट्रीय प्रतीक है।
राजवंशों का संरक्षण: मौर्य, कुषाण और गुप्त राजवंशों के शासनकाल में इसका विकास हुआ और यह बौद्ध शिक्षा का एक प्रमुख केंद्र बन गया।
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