उत्तर प्रदेश में स्थित प्राचीन बौद्ध स्थल सारनाथ को आधिकारिक तौर पर 25 जुलाई 2026 को दक्षिण कोरिया के बुसान में आयोजित विश्व धरोहर समिति के 48वें सत्र के दौरान UNESCO की विश्व धरोहर सूची में शामिल किया गया। इसके साथ ही यह भारत का 45वां विश्व धरोहर स्थल बन गया। यह मान्यता सारनाथ के वैश्विक महत्व को रेखांकित करती है, क्योंकि यही वह स्थान है जहाँ भगवान बुद्ध ने ज्ञान प्राप्ति के बाद अपना पहला उपदेश दिया था।
📜 सारनाथ के UNESCO में शामिल होने से जुड़ी मुख्य बातें
- शामिल होने की तारीख: 25 जुलाई 2026
- कार्यक्रम: UNESCO विश्व धरोहर समिति का 48वां सत्र, बुसान, दक्षिण कोरिया
- भारत की कुल संख्या: 45 विश्व धरोहर स्थल (37 सांस्कृतिक, 7 प्राकृतिक, 1 मिश्रित)
- क्रमबद्ध संपत्ति के घटक:
- चौखंडी स्तूप
- सारनाथ के पुरातात्विक अवशेष (धमेख स्तूप, धर्मराजिका स्तूप, मूलगंधकुटी विहार, अशोक स्तंभ, आदि)
🏛 ऐतिहासिक और आध्यात्मिक महत्व
- बुद्ध का पहला उपदेश: इसे ‘धर्मचक्र प्रवर्तन’ (“धर्म के पहिये का घूमना”) के रूप में जाना जाता है; यह छठी शताब्दी ईसा पूर्व में दिया गया था।
- पवित्र भूगोल: बौद्ध ग्रंथों में इसे ऋषिपत्तन, इसीपत्तन या मृगदाव (हिरण पार्क) के रूप में जाना जाता है।
- राष्ट्रीय प्रतीक: सारनाथ में खोजा गया अशोक का ‘लायन कैपिटल’ (सिंह शीर्ष) भारत का राष्ट्रीय प्रतीक है।
- राजवंशों का संरक्षण: मौर्य, कुषाण और गुप्त राजवंशों के शासनकाल में इसका विकास हुआ और यह बौद्ध शिक्षा का एक प्रमुख केंद्र बन गया।




