राष्ट्रीय हथकरघा दिवस हर साल 7 अगस्त को मनाया जाता है।

हर साल 7 अगस्त को ‘राष्ट्रीय हथकरघा दिवस’ (National Handloom Day) मनाया जाता है। यह दिन 1905 के स्वदेशी आंदोलन की याद में मनाया जाता है, जिसने देश में बने उत्पादों को बढ़ावा दिया और विदेशी सामानों का बहिष्कार किया। 2026 में, 12वां राष्ट्रीय हथकरघा दिवस नई दिल्ली के राष्ट्रपति भवन सांस्कृतिक केंद्र में मनाया गया, जिसमें राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू मुख्य अतिथि थीं।

2026 के समारोह में हथकरघा क्षेत्र में इनोवेशन, सस्टेनेबिलिटी और टेक्नोलॉजी पर ज़ोर दिया गया। बेहतरीन काम करने वाले बुनकरों को 3 ‘संत कबीर हथकरघा पुरस्कार’ और 19 ‘राष्ट्रीय हथकरघा पुरस्कार’ दिए गए। भारत की हथकरघा परंपराओं को दिखाने वाले चार यादगार डाक टिकट और प्रकाशन भी जारी किए गए।

हथकरघा क्षेत्र 35 लाख से ज़्यादा बुनकरों और उनसे जुड़े कामगारों को रोज़गार देता है, जिनमें से 72% महिलाएं हैं। यह ग्रामीण रोज़गार और महिलाओं के नेतृत्व वाले आर्थिक सशक्तिकरण का एक अहम ज़रिया है। बनारसी सिल्क, कांजीवरम, महेश्वरी, कोटा डोरिया और खादी जैसे पारंपरिक कपड़े भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को दर्शाते हैं।

परीक्षा के लिए ज़रूरी बातें:

  • राष्ट्रीय हथकरघा दिवस: 7 अगस्त
  • संबंधित घटना: स्वदेशी आंदोलन, 1905
  • पहली बार मनाया गया: 2015
  • 2026 संस्करण: 12वां
  • मुख्य अतिथि: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू
  • स्थान: राष्ट्रपति भवन सांस्कृतिक केंद्र, नई दिल्ली
  • संत कबीर हथकरघा पुरस्कार: 3
  • राष्ट्रीय हथकरघा पुरस्कार: 19
  • बुनकर और सहयोगी कामगार: 35 लाख से ज़्यादा
  • महिलाएं: वर्कफोर्स का 72%
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