रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया (RBI) की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2025–26 की जनवरी–मार्च तिमाही में भारत का करंट अकाउंट सरप्लस 7.1 बिलियन अमेरिकी डॉलर (GDP का 0.7%) रहा।
पूरे वित्त वर्ष 2025–26 के लिए भारत का करंट अकाउंट घाटा (CAD) 25.2 बिलियन अमेरिकी डॉलर (GDP का 0.6%) रहा, जबकि वित्त वर्ष 2024–25 में यह 22.9 बिलियन अमेरिकी डॉलर था।
RBI की रिपोर्ट में बताया गया है कि चौथी तिमाही में मर्चेंडाइज़ ट्रेड घाटा बढ़कर 83.4 बिलियन अमेरिकी डॉलर हो गया, जबकि नेट सर्विस रिसिप्ट्स बढ़कर 60.4 बिलियन अमेरिकी डॉलर हो गईं, जिससे बाहरी सेक्टर को सहारा मिला।
भारत में फॉरेन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट (FDI) में भी बढ़ोतरी देखी गई; वित्त वर्ष 2025–26 के दौरान नेट इनफ़्लो बढ़कर 6.9 बिलियन अमेरिकी डॉलर हो गया, जबकि पिछले साल यह 1.0 बिलियन अमेरिकी डॉलर था। हालांकि, इस वित्त वर्ष के दौरान फॉरेन पोर्टफोलियो इन्वेस्टमेंट (FPI) में 16.4 बिलियन अमेरिकी डॉलर का नेट आउटफ़्लो दर्ज किया गया।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि जनवरी–मार्च तिमाही में भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 7.2 बिलियन अमेरिकी डॉलर बढ़ा, हालांकि बैलेंस ऑफ़ पेमेंट्स (BoP) के आधार पर पूरे वित्त वर्ष 2025–26 के दौरान भंडार में 23.6 बिलियन अमेरिकी डॉलर की कमी आई।




