सिक्किम आधिकारिक तौर पर भारत का पहला ऐसा राज्य बन गया है जिसकी न्यायपालिका पूरी तरह से पेपरलेस है; यह न्यायिक सुधारों की दिशा में एक ऐतिहासिक उपलब्धि है। भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने 1 मई, 2026 को गंगटोक में आयोजित ‘प्रौद्योगिकी और न्यायिक शिक्षा पर राष्ट्रीय सम्मेलन’ के दौरान इसकी घोषणा की।
📌 घोषणा की मुख्य बातें
- तारीख और अवसर: 1 मई, 2026 को गंगटोक में आयोजित ‘प्रौद्योगिकी और न्यायिक शिक्षा पर राष्ट्रीय सम्मेलन’ के दौरान घोषणा की गई।
- घोषणाकर्ता: भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत।
- महत्व: सिक्किम भारत का पहला ऐसा राज्य बन गया है जिसकी न्यायपालिका पूरी तरह से पेपरलेस हो गई है।
- संदर्भ: यह घोषणा सिक्किम के 50वें राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर की गई, जिससे इसका प्रतीकात्मक महत्व और भी बढ़ गया।
⚖️ “पेपरलेस न्यायपालिका” का क्या अर्थ है
- मामलों की ई-फाइलिंग: सभी याचिकाएं और दस्तावेज डिजिटल रूप से दाखिल किए जाते हैं।
- वर्चुअल सुनवाई: वादी और वकील ऑनलाइन माध्यम से अदालती कार्यवाही में शामिल हो सकते हैं।
- डिजिटल केस ट्रैकिंग: मामलों की स्थिति से जुड़े अपडेट वास्तविक समय (real-time) में उपलब्ध होते हैं।
- स्वचालित कार्यप्रवाह: प्रौद्योगिकी की सहायता से अदालती प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित किया गया है।
- डिजिटल अभिलेखागार: भौतिक रिकॉर्ड (कागजी दस्तावेजों) से इलेक्ट्रॉनिक भंडारण (डिजिटल स्टोरेज) में पूर्ण रूप से बदलाव किया गया है।




