भगवान कृष्ण के जन्म का उत्सव, कृष्ण जन्माष्टमी, 4 सितंबर 2026 (शुक्रवार) को मनाया जा रहा है। भक्त इस मौके पर व्रत, प्रार्थना और आधी रात को पूजा-अर्चना करते हैं।
- भगवान कृष्ण का जन्म: कृष्ण का जन्म मथुरा में देवकी और वासुदेव के घर हुआ था और उन्हें गोकुल ले जाया गया, जहाँ नंद और यशोदा ने उनका पालन-पोषण किया।
- यह शुभ त्योहार भाद्रपद महीने (कुछ इलाकों में श्रावण) के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है।
- महत्व: आधी रात को उनका जन्म बुराई पर अच्छाई और अधर्म पर धर्म की जीत का प्रतीक है।
- भगवद गीता: बाद में कृष्ण ने महाभारत के युद्ध के मैदान में अर्जुन का मार्गदर्शन किया और उन्हें भगवद गीता का उपदेश दिया।
- प्रमुख परंपराएँ: झूलन उत्सव, भजन, कीर्तन, रासलीला और दही-हांडी जन्माष्टमी के जश्न के अहम हिस्से हैं।
- आधी रात की पूजा: निशिता पूजा का मुहूर्त रात 11:56 बजे से 12:42 बजे तक है।
- व्रत: कई भक्त आधी रात तक व्रत रखते हैं, जब कृष्ण का जन्म पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ मनाया जाता है।




