जनगणना (संशोधन) नियम 2026: जनगणना प्रगणकों के लिए पात्रता का दायरा बढ़ाया गया

गृह मंत्रालय ने 16 अक्टूबर, 2026 को जनगणना (संशोधन) नियम, 2026 अधिसूचित किए। इन नियमों के तहत जनगणना प्रगणकों की नियुक्ति के लिए पात्रता मानदंडों का विस्तार किया गया है, ताकि जनगणना कार्यों के लिए अधिक संख्या में कर्मचारियों की उपलब्धता सुनिश्चित की जा सके।

  • पात्र उम्मीदवार: सरकारी, सहायता प्राप्त और निजी शैक्षणिक संस्थानों के शिक्षक; सरकारी अधिकारी और लिपिक; स्थानीय प्राधिकरणों के कर्मचारी; तथा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (PSU), बैंकों, वैधानिक निकायों, कंपनियों, सोसायटियों और ट्रस्टों के कर्मचारी।
  • अतिरिक्त प्रावधान: राज्य और केंद्रशासित प्रदेशों के प्रशासन को किसी अन्य उपयुक्त व्यक्ति को जनगणना प्रगणक के रूप में नियुक्त करने का अधिकार दिया गया है।
  • प्रगणकों की भूमिका: घर-घर जाकर जनसांख्यिकीय, सामाजिक और आर्थिक आँकड़े एकत्र करना तथा जनसंख्या की सटीक गणना सुनिश्चित करना।
  • कानूनी ढाँचा: जनगणना अधिनियम, 1948।
  • जनगणना की आवृत्ति: प्रत्येक 10 वर्ष में एक बार।
  • पिछली जनगणना: वर्ष 2011 में हुई थी। कोविड-19 महामारी के कारण 2021 की जनगणना स्थगित कर दी गई थी।
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