15 अक्टूबर, 2026 को केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने चंडीगढ़ की सुखना आर्द्रभूमि और उत्तर प्रदेश की सौज झील को रामसर स्थलों की सूची में शामिल किए जाने की घोषणा की। इसके साथ ही भारत में रामसर स्थलों की कुल संख्या बढ़कर 103 हो गई।
महत्वपूर्ण बिंदु
- नए रामसर स्थल: सुखना आर्द्रभूमि (चंडीगढ़) और सौज झील (उत्तर प्रदेश)।
- सुखना आर्द्रभूमि: यह शिवालिक पहाड़ियों की तलहटी में स्थित है। यहाँ स्थानीय और प्रवासी जलपक्षियों को आवास मिलता है। इनमें संकटग्रस्त श्रेणी के निकट माने जाने वाले कॉमन पोचार्ड पक्षी भी शामिल हैं।
- सौज झील: यह समान पक्षी अभयारण्य के निकट गंगा के बाढ़ क्षेत्र में स्थित है। यहाँ नियमित रूप से 30,000 से अधिक जलपक्षी पाए जाते हैं, जिनमें संकटग्रस्त श्रेणी के निकट माने जाने वाला सारस भी शामिल है।
- अंतरराष्ट्रीय समझौता: आर्द्रभूमियों पर रामसर कन्वेंशन पर वर्ष 1971 में हस्ताक्षर किए गए थे। भारत वर्ष 1982 में इसका सदस्य बना।
- नीतिगत पहल: केंद्रीय बजट 2023–24 में घोषित अमृत धरोहर योजना आर्द्रभूमियों के संरक्षण और उनके सतत उपयोग को बढ़ावा देती है।
- महत्व: इन स्थलों को शामिल करने से जैव विविधता संरक्षण, प्रवासी पक्षियों के आवास, जल सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन के प्रति लचीलापन और स्थानीय समुदायों की आजीविका को मजबूती मिलती है।




