15 सितंबर 2026 को यमुना बेसिन के छह राज्यों—उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, राजस्थान, दिल्ली और हरियाणा—ने नई दिल्ली में यमुना की सहायक नदी टोंस नदी पर किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना के क्रियान्वयन के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर किए।
इस परियोजना में 232.6 मीटर ऊंचा कंक्रीट ग्रेविटी बांध बनाया जाएगा, जिसकी भंडारण क्षमता 1,562 मिलियन घन मीटर (MCM) होगी। केंद्र सरकार जल घटक की लागत का 90% वित्तपोषण करेगी, जबकि शेष 10% लागत छह राज्यों द्वारा साझा की जाएगी।
मुख्य लाभ
- सिंचाई: लगभग 97,000 हेक्टेयर कृषि भूमि की सिंचाई।
- जलविद्युत: 422 मेगावाट की स्थापित क्षमता और लगभग 1,476 मिलियन यूनिट वार्षिक बिजली उत्पादन।
- जल आपूर्ति: विशेष रूप से दिल्ली और राजस्थान के लिए पेयजल और औद्योगिक जल की उपलब्धता में सुधार।
- यमुना पुनर्जीवन: संग्रहित जल से पारिस्थितिक प्रवाह को बनाए रखने और नदी के स्वास्थ्य में सुधार में सहायता मिलेगी।
- जल सुरक्षा: यमुना बेसिन के जल संसाधनों के समन्वित अंतरराज्यीय प्रबंधन को बढ़ावा मिलेगा।
इस परियोजना को किशाऊ कॉरपोरेशन लिमिटेड द्वारा क्रियान्वित किया जाएगा, जो हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड का एक संयुक्त उपक्रम है। इस परियोजना की अवधारणा कई दशक पहले तैयार की गई थी। लंबे समय तक चली देरी और विवादों के बाद जून 2026 में नवीनतम सहमति बनी।




