लोकसभा ने 2 अप्रैल, 2025 को वक्फ (संशोधन) विधेयक 2025 पारित किया, जिसके पक्ष में 288 और विपक्ष में 232 मत पड़े। सदन ने मुसलमान वक्फ अधिनियम 1923 को निरस्त करते हुए मुसलमान वक्फ (निरसन) विधेयक 2024 को भी मंजूरी दी।
मुख्य प्रावधान और सरकार का रुख:
- केंद्रीय अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू ने विधेयक पेश करते हुए कहा कि यह केवल वक्फ संपत्तियों पर केंद्रित है और इसका उद्देश्य वक्फ बोर्डों को अधिक समावेशी और पारदर्शी बनाना है।
- यह विधेयक वक्फ बोर्डों में विभिन्न मुस्लिम संप्रदायों और महिलाओं का प्रतिनिधित्व अनिवार्य करता है।
- रिजिजू ने वक्फ कानूनों के दुरुपयोग की अनुमति देने के लिए यूपीए सरकार के तहत 2013 के संशोधनों की आलोचना की और सवाल किया कि भारत में दुनिया भर में सबसे अधिक वक्फ संपत्तियां होने के बावजूद भारतीय मुसलमान आर्थिक रूप से वंचित क्यों हैं।
विपक्ष की आलोचना:
- कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने विधेयक को असंवैधानिक बताया और आरोप लगाया कि यह अल्पसंख्यकों को बदनाम करने और समाज को विभाजित करने का प्रयास है।
- समाजवादी पार्टी के अखिलेश यादव ने सरकार पर बेरोजगारी और मुद्रास्फीति जैसे आर्थिक मुद्दों से ध्यान हटाने के लिए विधेयक का उपयोग करने का आरोप लगाया।
- टीएमसी के कल्याण बनर्जी, डीएमके के ए राजा और अन्य विपक्षी नेताओं ने विधेयक की आलोचना की और इसे अल्पसंख्यक विरोधी और मुस्लिम अधिकारों पर हमला बताया।
सरकार की प्रतिक्रिया:
- केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने स्पष्ट किया कि गैर-मुस्लिम वक्फ संपत्तियों का प्रबंधन नहीं करेंगे, उन्होंने धार्मिक प्रथाओं में हस्तक्षेप की आशंकाओं को खारिज कर दिया।
- उन्होंने तर्क दिया कि विधेयक का उद्देश्य भूमि कुप्रबंधन को रोकना और पारदर्शिता बढ़ाना है, उन्होंने वक्फ से संबंधित कानूनों के पिछले दुरुपयोग के लिए कांग्रेस को दोषी ठहराया।
- भाजपा के रविशंकर प्रसाद ने जोर देकर कहा कि यह विधेयक वक्फ बोर्डों में महिलाओं का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करके लैंगिक न्याय को बढ़ावा देता है।
अन्य दलों से समर्थन:
- टीडीपी के कृष्ण प्रसाद टेनेटी ने विधेयक का समर्थन किया, जिसमें 1.2 लाख करोड़ रुपये की वक्फ संपत्तियों के कुप्रबंधन पर प्रकाश डाला गया।
- जदयू नेता राजीव रंजन सिंह ने जोर देकर कहा कि यह विधेयक मुसलमानों के सभी वर्गों के लिए न्याय सुनिश्चित करता है और वक्फ संपत्तियों के दुरुपयोग पर अंकुश लगाता है।
- शिवसेना सांसद श्रीकांत शिंदे ने इस विधेयक को “उम्मीद” (एकीकृत वक्फ प्रबंधन सशक्तिकरण, दक्षता और विकास) के रूप में संदर्भित किया, जिसका उद्देश्य अल्पसंख्यकों का उत्थान करना है।
विधेयक का पारित होना वक्फ संपत्ति प्रबंधन में सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, हालांकि विवाद और राजनीतिक विरोध अभी भी मजबूत है।