विश्व आर्द्रभूमि दिवस हर साल 2 फरवरी को मनाया जाता है।

🌍 विश्व आर्द्रभूमि दिवस 2026

मनाया जाता है: हर वर्ष 2 फरवरी
महत्त्व: रामसर सम्मेलन (1971) के हस्ताक्षर की स्मृति में
स्थान: रामसर, ईरान

🎯 उद्देश्य

आर्द्रभूमियों के पारिस्थितिक, सांस्कृतिक और आर्थिक महत्त्व के प्रति जागरूकता बढ़ाना तथा उनके संरक्षण को बढ़ावा देना।


🌱 वर्ष 2026 की थीम

“आर्द्रभूमि और पारंपरिक ज्ञान: सांस्कृतिक विरासत का उत्सव”

🔹 यह थीम निम्न बातों पर जोर देती है:

  • पारंपरिक आजीविका के साधन
  • आदिवासी और स्थानीय ज्ञान प्रणालियाँ
  • सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक परंपराएँ
  • संसाधनों का सतत उपयोग

🔹 यह दर्शाती है कि कैसे स्थानीय एवं आदिवासी समुदायों ने पीढ़ियों से आर्द्रभूमियों का संरक्षण किया है।


🌊 आर्द्रभूमियों का महत्त्व

🐦 जैव विविधता

  • आर्द्रभूमियाँ सबसे अधिक उत्पादक पारिस्थितिक तंत्रों में शामिल
  • प्रवासी पक्षियों, मछलियों, उभयचरों और पौधों का आवास

🌍 जलवायु नियमन

  • कार्बन भंडार (Carbon Sink) के रूप में कार्य
  • जलवायु परिवर्तन को कम करने में सहायक

💧 जल सुरक्षा

  • प्राकृतिक जल फिल्टर
  • भूजल पुनर्भरण
  • बाढ़ एवं सूखे के प्रभाव को कम करती हैं

👨‍👩‍👧 आजीविका

  • मत्स्य पालन, कृषि, पर्यटन और हस्तशिल्प का आधार
  • करोड़ों लोग आर्द्रभूमियों पर निर्भर

🏛 सांस्कृतिक विरासत

  • पारंपरिक ज्ञान, रीति-रिवाजों और सतत उपयोग से निर्मित
  • स्थानीय पहचान और संस्कृति से गहरा संबंध

📌 विश्व आर्द्रभूमि दिवस 2026: प्रमुख विशेषताएँ

🇮🇳 भारत

  • केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने आर्द्रभूमियों को
    👉 “पृथ्वी की जीवनरेखा” बताया
  • संरक्षण में समुदायों और सांस्कृतिक विरासत को केंद्र में रखने पर जोर

🌿 मणिपुर

  • आर्द्रभूमि वर्चुअल संग्रहालय का शुभारंभ
  • जलवायु-सहिष्णु (Climate-Resilient) गाँवों को मान्यता

👩‍🎓 युवा सहभागिता

  • हैकाथॉन, संगोष्ठियाँ और छात्र-नेतृत्व वाले अभियान
  • नवी मुंबई में शहरी आर्द्रभूमियों पर नवाचार पर विशेष कार्यक्रम

📚 परीक्षा हेतु महत्वपूर्ण बिंदु (Prelims Ready)

  • रामसर सम्मेलन: 1971
  • विश्व आर्द्रभूमि दिवस: 2 फरवरी
  • थीम 2026: आर्द्रभूमि और पारंपरिक ज्ञान
  • आर्द्रभूमियाँ = जैव विविधता + जलवायु संरक्षण + आजीविका

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