रूबल नागी ने ग्लोबल टीचर प्राइज 2026 जीता।

भारतीय शिक्षाविद् और सामाजिक सुधारक रुबल नागी ने वर्ष 2026 का प्रतिष्ठित ग्लोबल टीचर प्राइज (Global Teacher Prize) जीता है, जिसकी राशि 10 लाख अमेरिकी डॉलर है। इसे अक्सर “शिक्षा का नोबेल” भी कहा जाता है। यह सम्मान उन्हें झुग्गी-झोपड़ियों को भित्ति चित्रों (म्यूरल्स) और सामुदायिक केंद्रों के माध्यम से जीवंत शिक्षण स्थलों में बदलने के उनके परिवर्तनकारी कार्य के लिए दिया गया है। इस पुरस्कार की घोषणा दुबई में आयोजित वर्ल्ड गवर्नमेंट्स समिट में की गई, जिसमें समावेशी शिक्षा के लिए उनके दो दशकों के समर्पण को मान्यता दी गई।

रुबल नागी: ग्लोबल टीचर प्राइज 2026 की विजेता

पुरस्कार के बारे में

ग्लोबल टीचर प्राइज:
वर्की फाउंडेशन द्वारा यूनेस्को के सहयोग से स्थापित।

पुरस्कार राशि:
10 लाख अमेरिकी डॉलर – शिक्षकों के लिए दिया जाने वाला विश्व का सबसे बड़ा अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार।

घोषणा स्थल:
5 फरवरी 2026, वर्ल्ड गवर्नमेंट्स समिट, दुबई।

महत्व:
ऐसे शिक्षकों को सम्मानित करता है जो पारंपरिक कक्षाओं से आगे बढ़कर समुदायों में सकारात्मक बदलाव लाते हैं।

रुबल नागी का योगदान

सामुदायिक शिक्षण केंद्र:
भारत के 100 से अधिक वंचित समुदायों में 800 से ज्यादा शिक्षण केंद्रों की स्थापना की, जहाँ उन बच्चों को शिक्षा मिली जो कभी स्कूल नहीं गए थे।

म्यूरल-आधारित कक्षाएँ:
झुग्गी-झोपड़ियों की उपेक्षित दीवारों को इंटरएक्टिव भित्ति चित्रों में बदला, जिनके माध्यम से साक्षरता, गणितीय कौशल, स्वच्छता और पर्यावरण जागरूकता सिखाई जाती है।

कला-आधारित शिक्षण पद्धति:
मुंबई की झुग्गियों से शुरुआत करते हुए कला को शिक्षा का माध्यम बनाया, जिससे बच्चों की भागीदारी बढ़ी और समावेशी शिक्षण वातावरण बना।

दर्शन:
उनका मानना है कि शिक्षा को “बच्चों तक वहीं पहुँचना चाहिए जहाँ वे हैं”, जिसमें रचनात्मकता, करुणा और निरंतरता का संतुलन हो।

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