पराक्रम दिवस हर साल 23 जनवरी को नेताजी सुभाष चंद्र बोस की बेजोड़ हिम्मत, लीडरशिप और भारत की आज़ादी की लड़ाई में उनके योगदान को सम्मान देने के लिए मनाया जाता है। भारत सरकार ने 2021 में इस दिन की शुरुआत की थी, और यह दिन उनकी अदम्य भावना और देशभक्ति को श्रद्धांजलि के रूप में मनाया जाता है।
🌟 मतलब और महत्व
- पराक्रम दिवस (वीरता का दिन) भारत के सबसे सम्मानित स्वतंत्रता सेनानियों में से एक, नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती मनाता है।
- पराक्रम शब्द का मतलब वीरता या साहस है, जो बोस की आज़ादी के लिए निडर कोशिश का प्रतीक है।
- यह सिर्फ़ एक याद नहीं है, बल्कि नागरिकों, खासकर युवाओं को उनकी बहादुरी और समर्पण की तरह बनने के लिए प्रेरित करने का एक राष्ट्रीय आह्वान है।
📜 ऐतिहासिक संदर्भ
- नेताजी का जन्म 23 जनवरी 1897 को कटक, ओडिशा में हुआ था।
- उन्होंने इंडियन नेशनल आर्मी (INA), जिसे आज़ाद हिंद फ़ौज के नाम से भी जाना जाता है, की स्थापना की और विदेश में आज़ाद हिंद सरकार बनाई।
- उनकी लीडरशिप ने औपनिवेशिक शासन को चुनौती दी और भारतीयों को ब्रिटिश राज के खिलाफ़ सशक्तिकरण और एकता की भावना दी।




