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भारत में चार नए लेबर कोड लागू किए गए

21 नवंबर 2025 को केंद्र सरकार ने भारत के श्रम कानूनों को सरल और आधुनिक बनाने के लिए चार नए श्रम संहिताओं (Labour Codes) के लागू होने की घोषणा की। श्रम एवं रोजगार मंत्री डॉ. मनसुख मंडाविया ने कहा कि इन सुधारों का उद्देश्य बेहतर वेतन, सुरक्षा, सामाजिक सुरक्षा और श्रमिक कल्याण सुनिश्चित करना है। उन्होंने इन्हें “हर श्रमिक की गरिमा की सरकार की गारंटी” बताया।


लागू की गई चार श्रम संहिताएँ

  1. वेज कोड, 2019
  2. इंडस्ट्रियल रिलेशंस कोड, 2020
  3. सोशल सिक्योरिटी कोड, 2020
  4. ऑक्यूपेशनल सेफ्टी, हेल्थ एंड वर्किंग कंडीशंस कोड, 2020

मुख्य लाभ

  • सभी श्रमिकों के लिए समय पर न्यूनतम वेतन की गारंटी
  • युवाओं को नियुक्ति पत्र (Appointment Letter) अनिवार्य
  • महिलाओं को समान काम का समान वेतन
  • 40 करोड़ श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा का लाभ
  • स्थायी अवधि (Fixed-term) कर्मचारियों को 1 वर्ष बाद ग्रेच्युटी
  • ओवरटाइम का दोगुना वेतन
  • 40 वर्ष से अधिक उम्र के श्रमिकों के लिए मुफ़्त वार्षिक स्वास्थ्य जांच
  • खतरनाक (Hazardous) क्षेत्रों में काम करने वालों के लिए पूर्ण स्वास्थ्य कवरेज

सामाजिक सुरक्षा का विस्तार

पिछले एक दशक में भारत के श्रमिकों का सामाजिक सुरक्षा कवरेज 2015 में 19% से बढ़कर 2025 में 64% से अधिक हो गया है। मंत्रालय ने कहा कि नई श्रम संहिताएँ लाभों की देशभर में पोर्टेबिलिटी को और मजबूत करती हैं।

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    राज्यसभा की संरचना:

    • कुल सदस्य संख्या: अधिकतम 250 सदस्य
    • वर्तमान संख्या (2025 में): 245 सदस्य
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    मुख्य आकर्षण थे:

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    🔍 मुख्य आरोप और निष्कर्ष:

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    • यह नकदी 30 तुगलक क्रेसेंट स्थित एक स्टोर रूम में मिली, जो जांच पैनल के अनुसार न्यायमूर्ति वर्मा और उनके परिवार के प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष नियंत्रण में था।
    • 15 मार्च को सबूतों को जानबूझकर हटाने की बात गवाहों के बयानों और इलेक्ट्रॉनिक सबूतों के आधार पर सामने आई।
    • यह आचरण न्यायिक जीवन के मूल्यों के पुनरुल्लेख (1997) – “Restatement of Values of Judicial Life” – का उल्लंघन करता है, जिसमें न्यायाधीशों के लिए उच्चतम नैतिक मानकों का पालन आवश्यक है।

    👩‍⚖️ जांच समिति के सदस्य:

    • मुख्य न्यायाधीश शील नागू (पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय)
    • मुख्य न्यायाधीश जी.एस. संधावालिया (हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय)
    • न्यायमूर्ति अनु शिवरामन (कर्नाटक उच्च न्यायालय)

    📜 आगे की प्रक्रिया:

    पूर्व मुख्य न्यायाधीश संजयव खन्ना द्वारा तैयार की गई 64 पृष्ठों की रिपोर्ट राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सौंपी गई है, जिसमें न्यायमूर्ति वर्मा के महाभियोग (impeachment) की सिफारिश की गई है।

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    विजय दिवस हर साल 16 दिसंबर को 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में भारत की ऐतिहासिक जीत की याद में मनाया जाता है, जिससे बांग्लादेश आज़ाद हुआ था। यह युद्ध 3 दिसंबर 1971 को शुरू हुआ और सिर्फ़ 13 दिनों तक चला, जिससे यह इतिहास के सबसे छोटे और निर्णायक युद्धों में से एक बन गया।

    यह संघर्ष पूर्वी पाकिस्तान में एक गंभीर मानवीय संकट के कारण शुरू हुआ, जहाँ अत्याचारों के कारण लाखों शरणार्थियों को भारत भागना पड़ा। इस संकट पर प्रतिक्रिया देते हुए, भारत ने हस्तक्षेप किया। 16 दिसंबर 1971 को, जनरल ए.ए.के. नियाज़ी के नेतृत्व में पाकिस्तान की पूर्वी कमान ने 93,000 सैनिकों के साथ भारतीय सशस्त्र बलों और मुक्ति वाहिनी के सामने बिना शर्त आत्मसमर्पण कर दिया – यह द्वितीय विश्व युद्ध के बाद सबसे बड़े सैन्य आत्मसमर्पणों में से एक था।

    इस जीत के परिणामस्वरूप बांग्लादेश का निर्माण हुआ और दक्षिण एशियाई भू-राजनीति में महत्वपूर्ण बदलाव आया। विजय दिवस भारत की सैन्य शक्ति, रणनीतिक नेतृत्व और मानवीय प्रतिबद्धता का प्रतीक है।