2 अप्रैल, 2026 को संसद द्वारा आंध्र प्रदेश पुनर्गठन (संशोधन) विधेयक, 2026 पारित किए जाने के बाद, अमरावती को आधिकारिक तौर पर आंध्र प्रदेश की स्थायी राजधानी घोषित कर दिया गया है। इस ऐतिहासिक निर्णय के साथ, 2014 में राज्य के विभाजन के बाद से चली आ रही एक दशक से अधिक की अनिश्चितता समाप्त हो गई है।
पृष्ठभूमि
- 2014: आंध्र प्रदेश का विभाजन हुआ, जिससे तेलंगाना राज्य का गठन हुआ। हैदराबाद को तेलंगाना की राजधानी के रूप में बरकरार रखा गया, जबकि आंध्र प्रदेश को एक नई राजधानी की आवश्यकता थी।
- 2015: तत्कालीन मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने अमरावती को राजधानी के रूप में प्रस्तावित किया; इसकी परिकल्पना एक आधुनिक, नदी-तटीय शहर के रूप में की गई थी।
- 2019–2024: राजनीतिक बदलावों के कारण तीन राजधानियों (विशाखापत्तनम, अमरावती और कुरनूल) के प्रस्ताव सामने आए, जिससे विरोध प्रदर्शन और कानूनी लड़ाइयाँ शुरू हो गईं।
- 2024: TDP के सत्ता में वापस आने के बाद अमरावती परियोजना को पुनर्जीवित किया गया।
- 2026: संसद ने संशोधन विधेयक पारित किया, जिससे अमरावती को एकमात्र और स्थायी राजधानी का दर्जा प्राप्त हो गया।



