25 जून 1975 को लगाए गए आपातकाल की 50वीं वर्षगांठ के मौके पर 25 जून 2026 को ‘संविधान हत्या दिवस’ मनाया गया।
25 जून 1975 को, तत्कालीन राष्ट्रपति फखरुद्दीन अली अहमद ने देश में आंतरिक अशांति का हवाला देते हुए संविधान के अनुच्छेद 352 के तहत राष्ट्रीय आपातकाल की घोषणा की थी।
यह आपातकाल उस समय लगाया गया था जब प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के नेतृत्व वाली सरकार राजनीतिक अस्थिरता और न्यायिक संकट के दौर से गुज़र रही थी।
आपातकाल के दौरान:
- केंद्र सरकार ने व्यापक कार्यकारी शक्तियों का इस्तेमाल किया।
- अनुच्छेद 358 के ज़रिए अनुच्छेद 19 के तहत मिलने वाले मौलिक अधिकारों (भाषण, अभिव्यक्ति, सभा करने और आने-जाने की आज़ादी) को निलंबित कर दिया गया।
- नागरिकों से इन अधिकारों के उल्लंघन की स्थिति में न्यायिक उपाय खोजने का अधिकार छीन लिया गया।
- प्रेस पर सेंसरशिप लागू की गई और प्रेस काउंसिल ऑफ़ इंडिया को खत्म कर दिया गया।
- संविधान संशोधनों के ज़रिए आपातकाल की घोषणा की न्यायिक समीक्षा को सीमित कर दिया गया और प्रधानमंत्री तथा लोकसभा अध्यक्ष के चुनाव को अदालती जांच के दायरे से बाहर कर दिया गया।




