15 मई 2026 को, हेग स्थित कोर्ट ऑफ़ आर्बिट्रेशन (CoA) ने भारत की सिंधु नदी जलविद्युत परियोजनाओं में “अधिकतम भंडारण क्षमता” (maximum pondage) पर एक फैसला सुनाया। भारत ने 16 मई 2026 को इस फैसले को सिरे से खारिज कर दिया, इसे “अमान्य और शून्य” करार दिया, और इस बात की फिर से पुष्टि की कि सिंधु जल संधि (IWT) अप्रैल 2025 से ही निलंबित (abeyance) स्थिति में है।
📌 मुख्य तथ्य
- संधि पर हस्ताक्षर: 19 सितंबर 1960 को, विश्व बैंक की मध्यस्थता से भारत (प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू) और पाकिस्तान (राष्ट्रपति अयूब खान) के बीच।
- जल-बंटवारा:
- भारत: रावी, ब्यास, सतलुज (पूर्वी नदियाँ)।
- पाकिस्तान: सिंधु, झेलम, चिनाब (पश्चिमी नदियाँ)।
- विवादित परियोजनाएँ: किशनगंगा (जम्मू-कश्मीर) और रातले (चिनाब बेसिन)।
- CoA के फैसले की तारीख: 15 मई 2026 (भंडारण क्षमता पर पूरक फैसला)।
- भारत की प्रतिक्रिया: 16 मई 2026 – विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने इस फैसले को “अमान्य और शून्य” घोषित किया।
- संधि की स्थिति: भारत ने अप्रैल 2025 में पहलगाम आतंकी हमले के बाद IWT को निलंबित कर दिया था, जिसमें 26 नागरिकों की जान चली गई थी।




