मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली उत्तर प्रदेश सरकार ने सरकारी भर्तियों में तेजी लाने के लिए 29 अक्टूबर 2026 को एकीकृत चरित्र एवं पूर्ववृत्त सत्यापन नीति लागू की। नई नीति के तहत, निर्धारित शर्तों के अधीन, चयनित उम्मीदवारों को पुलिस सत्यापन प्रक्रिया पूरी होने से पहले ही नियुक्ति पत्र जारी किए जा सकते हैं। सत्यापन संतोषजनक पाए जाने के बाद नियुक्ति की पुष्टि की जाएगी।
सत्यापन की समय-सीमा: पुलिस और अन्य संबंधित अधिकारियों को 30 दिनों के भीतर सत्यापन रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी।
अनावश्यक कार्यालय जाने से छूट: उम्मीदवारों को सामान्यतः सत्यापन के लिए पुलिस या प्रशासनिक कार्यालयों में जाने, व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने या अतिरिक्त दस्तावेज जमा करने की आवश्यकता नहीं होगी।
सुरक्षा की दृष्टि से संवेदनशील पद: निर्धारित प्रक्रिया और मुख्यमंत्री की पूर्व अनुमति के बाद विस्तृत सत्यापन पूरा होने पर ही नियुक्ति पत्र जारी किया जाएगा।
आपराधिक मामले: केवल FIR दर्ज होने, जांच लंबित होने या आरोपपत्र (Chargesheet) दाखिल होने से किसी उम्मीदवार को स्वतः अयोग्य घोषित नहीं किया जाएगा। उम्मीदवार की पात्रता अपराध की प्रकृति और कानूनी कार्यवाही के चरण पर निर्भर करेगी।
गलत जानकारी देना: आपराधिक मामलों को छिपाने या गलत जानकारी देने पर नियुक्ति रद्द की जा सकती है और कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है।
अपील का अवसर: यदि सत्यापन रिपोर्ट प्रतिकूल प्राप्त होती है, तो उम्मीदवारों को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाएगा। इसके लिए ऑनलाइन सुनवाई भी आयोजित की जा सकती है।
वर्तमान सरकारी कर्मचारी: पहले से सरकारी सेवा में कार्यरत कर्मचारियों को दोबारा चरित्र सत्यापन कराने की आवश्यकता नहीं होगी।
व्यापक प्रयोज्यता: यह नीति सरकारी विभागों, निगमों, शैक्षणिक संस्थानों, स्वायत्त निकायों, सरकारी उपक्रमों और स्थानीय निकायों में सीधी भर्ती पर लागू होगी। लंबित मामलों का निपटारा भी नए दिशा-निर्देशों के अनुसार किया जाएगा।
इस नीति का उद्देश्य भर्ती प्रक्रिया में होने वाली देरी को कम करना, पारदर्शिता बढ़ाना और उम्मीदवारों के लिए नियुक्ति प्रक्रिया को अधिक सुविधाजनक बनाना है।




