भारत और ऑस्ट्रेलिया ने 9 जुलाई 2026 को मेलबर्न में तीसरी भारत-ऑस्ट्रेलिया वार्षिक लीडर्स समिट के दौरान यूरेनियम निर्यात के लिए एक अहम समझौते पर हस्ताक्षर किए। यह समझौता ऑस्ट्रेलिया को इंटरनेशनल एटॉमिक एनर्जी एजेंसी (IAEA) की निगरानी में शांतिपूर्ण नागरिक परमाणु ऊर्जा के लिए भारत को यूरेनियम सप्लाई करने की इजाज़त देता है।
यह समझौता 2014-15 में हुए सिविल न्यूक्लियर कोऑपरेशन एग्रीमेंट को लागू करता है, जिससे यूरेनियम निर्यात में एक दशक से चली आ रही देरी खत्म हो गई है। उम्मीद है कि इससे भारत के क्लीन एनर्जी ट्रांज़िशन के तहत 2047 तक 100 GW परमाणु ऊर्जा क्षमता हासिल करने के लक्ष्य को मदद मिलेगी।
ऑस्ट्रेलिया, जिसके पास दुनिया का लगभग 28% यूरेनियम भंडार है, उसे निर्यात के लिए एक बड़ा बाज़ार मिलेगा, जबकि भारत को अपने परमाणु ऊर्जा संयंत्रों के लिए भरोसेमंद ईंधन सप्लाई से अपनी ऊर्जा सुरक्षा मज़बूत करने में मदद मिलेगी। यह समझौता भारत-ऑस्ट्रेलिया की रणनीतिक साझेदारी और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सहयोग को भी मज़बूत करता है।




