बसंत पंचमी, जिसे सरस्वती पूजा के नाम से भी जाना जाता है, एक जीवंत त्योहार है जो 23 जनवरी 2026 को पूरे भारत में वसंत के आगमन और ज्ञान, विद्या और कला की देवी सरस्वती की पूजा करने के लिए मनाया गया। यह आमतौर पर हिंदू कैलेंडर के अनुसार माघ महीने (जनवरी-फरवरी) में पड़ता है।
🌸 बसंत पंचमी का महत्व
- मौसमी महत्व: बसंत पंचमी वसंत ऋतु के आगमन की घोषणा करती है (बसंत का अर्थ है वसंत), जो नवीनीकरण, समृद्धि और खुशी का प्रतीक है।
- आध्यात्मिक महत्व: यह दिन देवी सरस्वती को समर्पित है, जो ज्ञान, संगीत, कला और संस्कृति का प्रतीक हैं।
- सांस्कृतिक महत्व: इसे नए काम, शैक्षिक कार्य या कलात्मक प्रयासों को शुरू करने के लिए एक शुभ दिन माना जाता है।
🙏 सरस्वती पूजा की परंपराएं
- देवी सरस्वती की पूजा: भक्त ज्ञान और रचनात्मकता के लिए आशीर्वाद लेने के लिए देवी की मूर्ति या तस्वीर के पास किताबें, वाद्य यंत्र और सीखने के उपकरण रखते हैं।
- पीला रंग: पीला रंग इस त्योहार का मुख्य रंग है, जो ऊर्जा, समृद्धि और आशावाद का प्रतीक है। लोग पीले कपड़े पहनते हैं, खिचड़ी और केसरिया चावल जैसे पीले व्यंजन बनाते हैं।
- शैक्षणिक संस्थान: स्कूल और कॉलेज सरस्वती पूजा का आयोजन करते हैं, और छात्रों को प्रार्थना और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।
- भोग: देवी को फूल, फल और मिठाई चढ़ाई जाती है, और भक्त सम्मान के प्रतीक के रूप में पूजा पूरी होने तक किताबें या पेन छूने से बचते हैं।




