भारतीय रेलवे 2025 में विद्युतीकरण के 100 वर्ष पूरे करते हुए दुनिया का सबसे बड़ा विद्युतीकृत रेल नेटवर्क बन गया है और इसने वैश्विक स्तर पर सभी अन्य रेल नेटवर्क्स को पीछे छोड़ दिया है। भारत के लगभग 70 हजार रूट-किलोमीटर लंबे ब्रॉड-गेज रेल नेटवर्क का लगभग पूरा हिस्सा अब बिजली से संचालित है। यह उपलब्धि सतत विकास, ऊर्जा दक्षता और परिवहन अवसंरचना के आधुनिकीकरण के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
🚆 भारतीय रेलवे विद्युतीकरण: समयरेखा
| वर्ष | उपलब्धि | विवरण |
|---|---|---|
| 1925 | पहली विद्युत ट्रेन | बॉम्बे वीटी (अब CSMT) से कुर्ला (हार्बर लाइन) के बीच 1.5 केवी डीसी प्रणाली से संचालन |
| 1930–40 का दशक | पश्चिमी घाट में विस्तार | खड़ी ढलानों से निपटने हेतु इगतपुरी और पुणे तक विद्युतीकरण |
| 1950 का दशक | 25 केवी एसी प्रणाली अपनाई | दक्षता और विस्तारशीलता के लिए वैश्विक मानक अपनाया गया |
| 1970–80 का दशक | तेज़ विस्तार | प्रमुख ट्रंक रूट्स का विद्युतीकरण, भाप/डीज़ल पर निर्भरता कम |
| 2000 का दशक | नीतिगत बढ़ावा | ऊर्जा सुरक्षा और डीज़ल आयात घटाने के लिए सरकार का ज़ोर |
| 2014–2023 | तीव्र अभियान | राष्ट्रीय मिशन के तहत ~6,000 किमी प्रति वर्ष की गति |
| 2023 | ब्रॉड-गेज का 100% विद्युतीकरण | सभी ब्रॉड-गेज पटरियों के विद्युतीकरण की घोषणा |
| 2025 | विद्युतीकरण के 100 वर्ष | पहली विद्युत ट्रेन के 100 वर्ष पूरे; विश्व का सबसे बड़ा विद्युतीकृत नेटवर्क |
🌍 वैश्विक परिप्रेक्ष्य
भारतीय रेलवे 68,000+ रूट-किलोमीटर संचालित करता है, जिनमें 100% ब्रॉड-गेज विद्युतीकृत है।
रूट लंबाई के आधार पर यह चीन और रूस जैसे देशों से आगे, दुनिया का सबसे बड़ा विद्युतीकृत रेल नेटवर्क है।
विद्युतीकरण से आयातित जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता घटती है, ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन कम होता है और भारत की जलवायु प्रतिबद्धताओं को बल मिलता है।
प्रमुख तथ्य
- पहला विद्युत लोकोमोटिव: “सर लेस्ली विल्सन” (1925)
- तकनीकी परिवर्तन: 1.5 केवी डीसी से 25 केवी एसी—वैश्विक मानकों के अनुरूप
- पर्यावरणीय प्रभाव: हर वर्ष अरबों लीटर डीज़ल की बचत और CO₂ उत्सर्जन में उल्लेखनीय कमी
- आर्थिक प्रभाव: कम परिचालन लागत, तेज़ ट्रेनें और बेहतर विश्वसनीयता




