स्वीडन 7 मार्च 2024 को आधिकारिक तौर पर उत्तरी अटलांटिक संधि संगठन (NATO) में शामिल हो गया, और इस सैन्य गठबंधन का 32वां सदस्य बन गया। इस ऐतिहासिक कदम के साथ स्वीडन की 200 साल से भी ज़्यादा पुरानी ‘सैन्य गुटनिरपेक्षता’ की नीति समाप्त हो गई, जो नेपोलियन युद्धों के समय से चली आ रही थी।
स्वीडन ने वाशिंगटन, D.C. में अपना ‘शामिल होने का दस्तावेज़’ जमा करके इस प्रक्रिया को औपचारिक रूप से पूरा किया। इसके साथ ही उसे NATO के ‘सामूहिक रक्षा सिद्धांत’ (Article 5) का संरक्षण मिल गया। इस सिद्धांत के अनुसार, किसी एक सदस्य देश पर हुआ हमला सभी सदस्य देशों पर हुआ हमला माना जाता है।
4 अप्रैल 1949 को स्थापित NATO एक सैन्य गठबंधन है, जिसका मुख्यालय बेल्जियम के ब्रुसेल्स शहर में है। इसका मुख्य उद्देश्य सदस्य देशों के बीच सामूहिक सुरक्षा सुनिश्चित करना है। स्वीडन के शामिल होने के साथ ही, अब इस गठबंधन में कुल 32 देश हो गए हैं।
स्वीडन अपने साथ उन्नत सशस्त्र बल, मज़बूत रक्षा उद्योग और आर्कटिक व बाल्टिक क्षेत्रों में रणनीतिक विशेषज्ञता लेकर आया है, जिससे NATO के उत्तरी मोर्चे को और अधिक मज़बूती मिली है। हालाँकि, इस विस्तार के कारण रूस के साथ तनाव भी बढ़ गया है, क्योंकि रूस हमेशा से ही NATO के विस्तार का विरोध करता रहा है।
कुल मिलाकर, स्वीडन की सदस्यता यूरोपीय सुरक्षा नीति में एक बड़ा बदलाव है और यह दुनिया के सबसे बड़े सैन्य गठबंधन के रूप में NATO की स्थिति को और अधिक सुदृढ़ करती है।




