1 अप्रैल, 2026 से, भारत ने तीन बड़े वित्तीय और कंप्लायंस सुधार लागू किए—आयकर अधिनियम, 2025, डिजिटल पेमेंट्स के लिए अनिवार्य टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन, और PAN आवेदन के संशोधित नियम—ताकि टैक्स व्यवस्था को आसान बनाया जा सके, सुरक्षा बढ़ाई जा सके और पहचान सत्यापन को मज़बूत किया जा सके।
- 🧾 नई आयकर प्रणाली
- यह पुराने आयकर अधिनियम, 1961 की जगह लेती है।
- इसमें आसान टैक्स स्लैब, ज़्यादा कटौतियाँ और कैपिटल गेन्स के सरल नियम शामिल हैं।
- बेहतर कंप्लायंस के लिए TDS/TCS के संशोधित नियम और ITR की समय-सीमाएँ तय की गई हैं।
- उद्देश्य: टैक्स व्यवस्था को आसान और आधुनिक बनाना।
- 🔐 सुरक्षित डिजिटल पेमेंट्स
- भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा अनिवार्य किया गया।
- सभी लेन-देन (UPI, कार्ड, नेट बैंकिंग) के लिए टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन (2FA) ज़रूरी है।
- यह धोखाधड़ी से सुरक्षा बढ़ाता है और डिजिटल प्रणालियों पर भरोसा मज़बूत करता है।
- 🆔 PAN कार्ड के नए नियम
- नए PAN आवेदनों के लिए आधार से लिंक करना अनिवार्य है।
- आवेदन और ई-सत्यापन की पूरी प्रक्रिया डिजिटल है।
- दुरुपयोग को रोकने के लिए KYC के सख़्त नियम लागू किए गए हैं।
- PAN जारी करने की प्रक्रिया अब तेज़ हो गई है।




