31 मई विश्व तंबाकू निषेध दिवस है।
हर साल 31 मई को ‘विश्व तंबाकू निषेध दिवस’ मनाया जाता है, जिसका मकसद तंबाकू के इस्तेमाल और निकोटीन की लत के हानिकारक प्रभावों के बारे में जागरूकता फैलाना है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने 2026 के लिए “आकर्षण का पर्दाफ़ाश – निकोटीन और तंबाकू की लत का मुकाबला” (Unmasking the Appeal – Countering Nicotine and Tobacco Addiction) विषय चुना है।
इस अभियान का मुख्य उद्देश्य बच्चों और किशोरों को ई-सिगरेट, वेप्स और फ्लेवर्ड निकोटीन उत्पादों के बढ़ते इस्तेमाल से बचाना है। इन उत्पादों को अक्सर पारंपरिक तंबाकू के मुकाबले ज़्यादा फैशनेबल और सुरक्षित विकल्प के तौर पर प्रचारित किया जाता है। WHO के अनुसार, दुनिया भर में 13 से 15 साल की उम्र के लगभग 1.5 करोड़ किशोर ई-सिगरेट का इस्तेमाल करते हैं, और वयस्कों की तुलना में युवाओं में वेपिंग करने की संभावना काफ़ी ज़्यादा होती है।
तंबाकू आज भी जन स्वास्थ्य के लिए एक बड़ी चुनौती बना हुआ है, जिसके कारण हर साल दुनिया भर में 70 लाख से ज़्यादा लोगों की मौत हो जाती है। भारत में, तंबाकू से जुड़ी बीमारियों के कारण हर साल लगभग 13.5 लाख लोगों की जान जाती है; इनमें भी, गुटखा, खैनी और पान मसाला जैसे ‘धुआँ-रहित’ तंबाकू उत्पादों से होने वाले मुँह के कैंसर के मामले विशेष रूप से आम हैं।
तंबाकू और निकोटीन की लत को कम करने के लिए, WHO सरकारों से आग्रह करता है कि वे फ्लेवर्ड उत्पादों पर प्रतिबंध लगाएँ, सादी पैकेजिंग (plain packaging) को अनिवार्य करें, विज्ञापन और प्रायोजन पर रोक लगाएँ, और तंबाकू उत्पादों पर लगने वाले करों में वृद्धि करें। यह दिवस युवाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने और तंबाकू-मुक्त भविष्य को बढ़ावा देने के लिए और भी अधिक कड़े कदम उठाए जाने की आवश्यकता पर ज़ोर देता है।





























