NASA ने ISRO को मून बेस प्रोग्राम में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया।

NASA ने ISRO को अपने मून बेस कार्यक्रम में भाग लेने के लिए आमंत्रित किया है। इस कार्यक्रम पर 5–6 अगस्त 2026 को बेंगलुरु में आयोजित भारत-अमेरिका नागरिक अंतरिक्ष संयुक्त कार्य समूह (India-U.S. Civil Space Joint Working Group) की बैठक के दौरान चर्चा हुई। इस पहल का उद्देश्य चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के पास एक स्थायी मानव चौकी स्थापित करना है।

  • चरण 1 (2026–2029): रोबोटिक अन्वेषण और तकनीकी परीक्षण।
  • चरण 2 (2029–2032): चंद्रमा पर दीर्घकालिक मानव उपस्थिति के लिए आवश्यक बुनियादी ढाँचे का विकास।
  • चरण 3 (2032 के बाद): एक स्थायी चंद्र आधार की स्थापना।
  • भारत की भूमिका: चंद्र अन्वेषण, तकनीकी सहयोग और अमेरिका के साथ वैज्ञानिक डेटा साझा करने को मजबूत करना।
  • आर्टेमिस समझौता (Artemis Accords): भारत ने जून 2023 में 27वें हस्ताक्षरकर्ता देश के रूप में इसमें शामिल हुआ।
  • NISAR: यह साझेदारी NASA-ISRO Synthetic Aperture Radar (NISAR) मिशन पर आधारित है, जिसे 2025 में लॉन्च किया गया था।
  • रणनीतिक महत्व: यह सहयोग भारत-अमेरिका अंतरिक्ष सहयोग को मजबूत करता है और भविष्य में चंद्रमा तथा मंगल ग्रह के अन्वेषण का समर्थन करता है। इसमें चंद्र संसाधनों के उपयोग, जैसे पानी निकालना और ईंधन का उत्पादन करना, भी शामिल है।

📌 एक-पंक्ति अतिरिक्त तथ्य

आर्टेमिस समझौते (Artemis Accords) की स्थापना अक्टूबर 2020 में NASA और अमेरिकी विदेश विभाग द्वारा शांतिपूर्ण नागरिक अंतरिक्ष अन्वेषण के लिए एक गैर-बाध्यकारी रूपरेखा के रूप में की गई थी। यह समझौता 1967 की बाह्य अंतरिक्ष संधि (Outer Space Treaty) के सिद्धांतों पर आधारित है।

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