अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान ने 18 जून 2026 को वर्चुअली एक ऐतिहासिक 14-सूत्रीय समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए। यह कदम सालों के संघर्ष के बाद पश्चिम एशिया में स्थिरता लाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
🌍 14-सूत्रीय MoU की मुख्य बातें
- युद्धविराम का वादा: दोनों देशों ने 15 जून के शांति समझौते का पालन करने और सैन्य गतिविधियों को स्थायी रूप से रोकने का संकल्प लिया।
- होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz): बिना टोल के शिपिंग और बिना रोक-टोक आवाजाही की पुष्टि की गई, जो वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा के लिए बहुत ज़रूरी है।
- परमाणु कार्यक्रम की निगरानी: ईरान 60 दिनों के युद्धविराम के दौरान IAEA की निगरानी के लिए सहमत हुआ।
- प्रतिबंधों में ढील: अगर ईरान परमाणु समझौतों का पालन करता है, तो अमेरिका ने प्रतिबंधों में ढील देने की इच्छा जताई।
- आतंकवाद-रोधी सहयोग: लेबनान और सीरिया में प्रॉक्सी समूहों को हथियारों की सप्लाई रोकने के लिए संयुक्त तंत्र।
- मानवीय सहायता: संघर्ष वाले इलाकों में सहायता पहुंचाने में मदद करने का समझौता।
- क्षेत्रीय बातचीत: सऊदी अरब, कतर, तुर्की और पाकिस्तान की भागीदारी के साथ ‘पश्चिम एशिया शांति मंच’ की स्थापना।
- आर्थिक सहयोग: कृषि और टेक्नोलॉजी जैसे गैर-तेल क्षेत्रों में अमेरिका-ईरान व्यापार की योजना।
- ऊर्जा सुरक्षा: ईरान तेल निर्यात को स्थिर करेगा; अमेरिका बुनियादी ढांचे के आधुनिकीकरण में मदद करेगा।
- राजनयिक चैनल: संकट के समय बातचीत के लिए वाशिंगटन और तेहरान के बीच वर्चुअल हॉटलाइन।
- सांस्कृतिक आदान-प्रदान: छात्रों और एकेडमिक सहयोग के लिए पहल।
- साइबर सुरक्षा: ऊर्जा बुनियादी ढांचे को निशाना बनाने वाले साइबर हमलों के खिलाफ संयुक्त टास्क फोर्स।
- पर्यावरण सहयोग: जलवायु लचीलेपन और जल प्रबंधन पर सहयोग।
- भविष्य का शिखर सम्मेलन: 19 जून 2026 को जिनेवा, स्विट्जरलैंड में आमने-सामने हस्ताक्षर समारोह तय किया गया है।




