भारत में 2026 का दक्षिण-पश्चिम मॉनसून एक मज़बूत ‘अल नीनो’ (El Niño) घटना से काफ़ी प्रभावित हो रहा है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, जून की शुरुआत में बारिश सामान्य से काफ़ी कम रही और पूरे मॉनसून सीज़न के दौरान भी बारिश के औसत से कम रहने की उम्मीद है। इस स्थिति से खेती, खाने-पीने की चीज़ों की कीमतें, जल संसाधन और कुल आर्थिक विकास को लेकर चिंताएँ बढ़ गई हैं।
मुख्य बातें
- बारिश में कमी: IMD की रिपोर्ट के अनुसार, 4 से 15 जून 2026 के बीच बारिश में 64% तक की कमी देखी गई।
- मॉनसून का अनुमान: सीज़न के दौरान बारिश ‘लॉन्ग पीरियड एवरेज’ (LPA) का लगभग 90% रहने की उम्मीद है, जो ‘सामान्य से कम’ (below-normal) की श्रेणी में आता है।
- खेती पर जोखिम: बारिश पर निर्भर फ़सलों जैसे चावल, दाल, कपास और गन्ने की पैदावार कम हो सकती है।
- आर्थिक चिंताएँ: खेती का उत्पादन घटने से खाने-पीने की चीज़ों की महंगाई बढ़ सकती है और ग्रामीण इलाकों में आर्थिक गतिविधियाँ धीमी हो सकती हैं।
- सबसे ज़्यादा प्रभावित क्षेत्र: भारत के मध्य, पूर्वी और दक्षिणी हिस्सों पर इसका सबसे ज़्यादा असर पड़ने की उम्मीद है।
अल नीनो क्या है?
अल नीनो एक मौसमी घटना है जो मध्य और पूर्वी प्रशांत महासागर में समुद्र की सतह के तापमान के बढ़ने से जुड़ी है। यह ‘अल नीनो-सदर्न ऑसिलेशन’ (ENSO) चक्र का हिस्सा है।
यह भारत को कैसे प्रभावित करता है
- प्रशांत महासागर के ऊपर चलने वाली व्यापारिक हवाओं (trade winds) को कमज़ोर करता है।
- वैश्विक वायुमंडलीय परिसंचरण (global atmospheric circulation) को बदलता है।
- भारत की ओर नमी के बहाव को कम करता है।
- अक्सर इसके कारण मॉनसून की बारिश कमज़ोर होती है, सूखे जैसे हालात बनते हैं और तापमान बढ़ता है।




