केरल का नाम बदलकर “केरलम” किया जाएगा: केरल (नाम परिवर्तन) विधेयक 2026

केरल (नाम परिवर्तन) विधेयक, 2026 के तहत केरल राज्य का आधिकारिक नाम बदलकर “केरलम” किया जाना है। इसका उद्देश्य राज्य की संवैधानिक पहचान को स्थानीय मलयालम भाषा में प्रचलित नाम के अनुरूप करना है। यह विधेयक 11 अगस्त 2026 को लोकसभा में पारित हुआ। विधेयक में नए नाम को लागू करने के लिए संविधान के कई प्रावधानों में संशोधन किया गया है।

📜 पृष्ठभूमि एवं इतिहास

  • केरल विधानसभा का प्रस्ताव (2024): केरल विधानसभा ने सर्वसम्मति से राज्य का नाम बदलकर केरलम करने का प्रस्ताव पारित किया। इसके पीछे भाषाई और सांस्कृतिक प्रामाणिकता को आधार बनाया गया।
  • केंद्रीय मंत्रिमंडल की मंजूरी (फरवरी 2026): प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने संविधान के अनुच्छेद 3 के तहत निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार नाम परिवर्तन के प्रस्ताव को मंजूरी दी।
  • संसद में पारित (अगस्त 2026): विधेयक को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा पेश किया गया और बाद में गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने इसे आगे बढ़ाया।

⚖️ संवैधानिक संशोधन

विधेयक में संविधान के कई अनुच्छेदों और अनुसूचियों में बदलाव किए गए हैं:

  • अनुच्छेद 31A एवं 290A: “Kerala” के स्थान पर “Keralam” किया जाएगा।
  • पहली अनुसूची: राज्यों की आधिकारिक सूची में केरल के नाम को अपडेट किया जाएगा।
  • चौथी अनुसूची: राज्यसभा में सीटों के आवंटन से संबंधित संदर्भों में बदलाव किया जाएगा।
  • कानूनों का अनुकूलन: केंद्र और राज्य सरकारों को एक वर्ष के भीतर कानूनों, अधिसूचनाओं और सरकारी अभिलेखों में नए नाम को लागू करने का अधिकार दिया गया है।

🌍 नाम परिवर्तन का महत्व

  • सांस्कृतिक पहचान: “केरलम” मलयालम भाषा में राज्य का मूल नाम है। यह भाषाई गौरव और ऐतिहासिक निरंतरता को दर्शाता है।
  • ऐतिहासिक संदर्भ: यह नाम केरल पिरवी से भी जुड़ा है, जिसे केरल के गठन दिवस के रूप में 1 नवंबर 1956 को मनाया जाता है।
  • पूर्व उदाहरण: भारत में पहले भी राज्यों के नाम बदले गए हैं, जैसे उड़ीसा → ओडिशा (2011) और उत्तरांचल → उत्तराखंड (2007)
  • प्रतीकात्मक महत्व: नाम परिवर्तन क्षेत्रीय पहचान को मजबूत करता है और भाषाई आधार पर राज्यों के गठन के सिद्धांत के अनुरूप है।

🦁 केरल की जनसांख्यिकी एवं पहचान

  • जनसंख्या: केरल की जनसंख्या 3.5 करोड़ (35 मिलियन) से अधिक है। राज्य की साक्षरता दर लगभग 96% है और मानव विकास के कई संकेतकों में इसका प्रदर्शन मजबूत है।
  • भाषा: मलयालम राज्य की आधिकारिक भाषा है और “केरलम” इसका प्रचलित स्थानीय नाम है।
  • सांस्कृतिक विरासत: केरल ओणम, कथकली, आयुर्वेद और अपने ऐतिहासिक मसाला व्यापार के लिए प्रसिद्ध है।
  • भौगोलिक विशेषताएँ: यह एक तटीय राज्य है, जहाँ पश्चिमी घाट की जैव-विविधता, प्रसिद्ध बैकवाटर्स और उच्च शहरीकरण देखने को मिलता है।

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