भारत ने 350 kg थ्रस्ट क्लास का पहला स्वदेशी एक्सपेंडेबल टर्बो जेट इंजन विकसित किया।

भारत ने 350 किलोग्राम थ्रस्ट क्लास वाला अपना पहला स्वदेशी ‘एक्सपेंडेबल टर्बो जेट इंजन’ सफलतापूर्वक विकसित कर लिया है, जो देश की डिफेंस टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि है।

इस इंजन को डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गनाइज़ेशन (DRDO) ने अपनी इकाई ‘गैस टरबाइन रिसर्च एस्टेब्लिशमेंट’ (GTRE) के ज़रिए डिज़ाइन किया था। इसे ‘आज़ाद इंजीनियरिंग’ ने सफलतापूर्वक बनाया और GTRE को सौंपा।

रक्षा मंत्रालय ने इस उपलब्धि को सटीक इंजीनियरिंग, एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग और DRDO व भारतीय रक्षा उद्योग के बीच सहयोग का नतीजा बताया है। चूंकि जेट इंजन टेक्नोलॉजी दुनिया के सबसे जटिल इंजीनियरिंग क्षेत्रों में से एक है, इसलिए इस विकास से भारत की स्वदेशी रक्षा क्षमताएं काफी मज़बूत होती हैं।

रक्षा सचिव और DRDO के चेयरमैन राजेश कुमार सिंह ने GTRE और आज़ाद इंजीनियरिंग को बधाई दी और इस प्रोजेक्ट को रक्षा टेक्नोलॉजी में आत्मनिर्भरता की दिशा में भारत की यात्रा का एक ऐतिहासिक मील का पत्थर बताया।

Scroll to Top