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भारतीय मूल के वैज्ञानिक जय भट्टाचार्य ने अमेरिका में एनआईएच निदेशक का कार्यभार संभाला

भारतीय मूल के वैज्ञानिक जय भट्टाचार्य को नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ (NIH) के 18वें निदेशक के रूप में पुष्टि की गई है। 🎉 राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा नामित, उन्हें 25 मार्च, 2025 को अमेरिकी सीनेट द्वारा 53-47 वोटों के साथ पुष्टि की गई थी।

डॉ. भट्टाचार्य स्वास्थ्य नीति और अर्थशास्त्र के एक प्रसिद्ध विशेषज्ञ हैं, जिन्होंने स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय से एमडी और पीएचडी की उपाधि प्राप्त की है। स्टैनफोर्ड में प्रोफेसर, नेशनल ब्यूरो ऑफ इकोनॉमिक रिसर्च में रिसर्च एसोसिएट और हूवर इंस्टीट्यूशन में सीनियर फेलो के रूप में उनका शानदार करियर रहा है। 📚 उनका अभूतपूर्व शोध अर्थशास्त्र, सार्वजनिक स्वास्थ्य और स्वास्थ्य नीति तक फैला हुआ है, जो दुनिया भर में जीवन को प्रभावित करता है।

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    2026 में, PBD को बिना सम्मेलन वाले साल के तौर पर मनाया गया, जिसमें भारत में एक केंद्रीय सभा के बजाय दुनिया भर में भारतीय दूतावासों और मिशनों ने स्थानीय कार्यक्रम आयोजित किए। इन समारोहों में संस्कृति, अर्थव्यवस्था, वैश्विक साझेदारी और राष्ट्र निर्माण में प्रवासी भारतीयों के योगदान पर प्रकाश डाला गया।

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    विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) ने जनवरी 2026 में उच्च शिक्षा संस्थानों में जाति-आधारित भेदभाव को रोकने के लिए नए कानूनी रूप से बाध्यकारी दिशानिर्देश जारी किए हैं। इन नियमों को “उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने संबंधी विनियम, 2026” कहा गया है।
    ये नियम 2012 की पूर्व परामर्शात्मक (Advisory) व्यवस्था की जगह लेंगे और UGC से मान्यता प्राप्त सभी विश्वविद्यालयों एवं कॉलेजों पर अनिवार्य रूप से लागू होंगे


    📌 UGC के नए दिशानिर्देशों की मुख्य विशेषताएँ

    कानूनी ढांचा:
    2012 के दिशानिर्देशों के विपरीत, 2026 के नियम अनिवार्य एवं लागू करने योग्य हैं। इनके उल्लंघन पर दंड का प्रावधान है।

    भेदभाव की विस्तृत परिभाषा:
    इन नियमों में अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के छात्रों को स्पष्ट रूप से शामिल किया गया है, जिससे पहले OBC को बाहर रखने की कमी दूर हुई है।

    समान अवसर केंद्र (Equal Opportunity Centres – EOC):
    प्रत्येक संस्थान में EOC की स्थापना अनिवार्य होगी, जो शिकायतों का निपटारा, समावेशन को बढ़ावा और नियमों के अनुपालन की निगरानी करेगा।

    जवाबदेही:
    विश्वविद्यालयों के कुलपति, कॉलेज प्राचार्य और संस्थान प्रमुख समानता सुनिश्चित करने और भेदभाव रोकने के लिए सीधे तौर पर जिम्मेदार होंगे।

    शिकायत निवारण तंत्र:
    प्रवेश, छात्रावास, कक्षा और शिक्षकों के साथ व्यवहार से जुड़ी जाति-आधारित शिकायतों के लिए अलग शिकायत तंत्र स्थापित करना अनिवार्य होगा।

    दंडात्मक प्रावधान:
    नियमों का पालन न करने पर वित्तीय दंड, मान्यता रद्द होना या अन्य अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है।


    🏛 शैक्षणिक परिसरों पर प्रभाव

    छात्र:
    हाशिए पर रहे वर्गों को अधिक सुरक्षा मिलेगी और शिक्षा, छात्रावास व सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों में सम्मान और समान अवसर सुनिश्चित होंगे।

    शिक्षक एवं कर्मचारी:
    भेदभाव रोकने हेतु संवेदनशीलता प्रशिक्षण (Sensitization Programs) अनिवार्य होंगे।

    संस्थान:
    जागरूकता अभियान, शिकायत रिपोर्टिंग प्रणाली और समावेशन की नियमित ऑडिट जैसे सक्रिय उपाय अपनाने होंगे।


    📊 तुलना: पुराने और नए दिशानिर्देश

    पहलू2012 के दिशानिर्देश2026 के दिशानिर्देश
    प्रकृतिकेवल परामर्शात्मककानूनी रूप से बाध्यकारी
    कवरेजकेवल SC/ST छात्रSC, ST, OBC छात्र
    अनुपालनस्वैच्छिकअनिवार्य, दंड सहित
    शिकायत तंत्रसामान्य निवारणजाति-आधारित समर्पित तंत्र
    संस्थागत भूमिकासमानता को प्रोत्साहनEOC अनिवार्य

  • ट्रम्प ने वैश्विक टैरिफ पर 90 दिनों के लिए रोक लगाई, चीन को इसमें शामिल नहीं किया

    9 अप्रैल, 2025 को, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने चीन को छोड़कर सभी देशों के लिए टैरिफ पर 90 दिनों की रोक की घोषणा की, जिसने कई दिनों की तीखी बयानबाजी के बाद कई लोगों को चौंका दिया। ट्रम्प ने रोक के कारण के रूप में 75 से अधिक देशों द्वारा गैर-प्रतिशोध का हवाला दिया, और इस अवधि के दौरान, 10% कम पारस्परिक टैरिफ लागू होगा। हालाँकि, चीन पर टैरिफ को बढ़ाकर 125% कर दिया गया, जो चल रहे तनाव को दर्शाता है।

    यह रोक आंतरिक चिंताओं, विशेष रूप से अमेरिकी ट्रेजरी विभाग की ओर से, बॉन्ड मार्केट में बिकवाली और वैश्विक मंदी की आशंकाओं के बीच आई। ट्रम्प ने स्वीकार किया कि यह निर्णय भावनात्मक रूप से प्रेरित था, उन्होंने दावा किया कि यह “दिल से लिखा गया था।” इस कदम से अमेरिका में शेयर बाजार में भारी उछाल आया:

    • डॉव जोन्स में करीब 2,500 अंकों की उछाल आई
    • नैस्डैक में 12.2% की उछाल आई, जो 24 साल में इसका सबसे अच्छा दिन था
    • एसएंडपी 500 में 6% की उछाल आई
    • तेल की कीमतें और अमेरिकी डॉलर में भी मजबूती आई

    भारत पर प्रभाव:

    भारत पर 26% पारस्परिक टैरिफ का असर पड़ा था, लेकिन 90 दिनों के विराम से राहत मिलने की उम्मीद है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत सरकार अमेरिका के साथ चल रही बातचीत के माध्यम से पारस्परिक रूप से लाभकारी व्यापार समझौते की दिशा में काम कर रही है।

  • मानसून सत्र 2025 की घोषणा: प्रमुख विधेयक, विपक्ष की मांगें और ऑपरेशन सिंदूर एजेंडे पर

    केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने घोषणा की है कि संसद का मानसून सत्र 21 जुलाई से 12 अगस्त 2025 तक चलेगा, जिसमें पहले दिन दोनों सदन सुबह 11 बजे से शुरू होंगे।
    पहलगाम में आतंकी हमले और पाकिस्तान और पीओके में आतंकी ठिकानों के खिलाफ भारत के जवाबी ऑपरेशन सिंदूर पर चर्चा के लिए विपक्ष द्वारा विशेष सत्र की मांग के कारण सत्र में काफी हलचल रहने की उम्मीद है।

  • स्टार्टअप इंडिया – 10-साल की समरी (2016–2026)

    स्टार्टअप इंडिया की शुरुआत 16 जनवरी 2016 को हुई थी और इसने भारत को एक प्रमुख वैश्विक स्टार्टअप हब में बदलते हुए एक दशक पूरा कर लिया है। इस पहल ने भारत को नौकरी खोजने वाले देश से नौकरी देने वाला देश बनाने में अहम भूमिका निभाई। इसी उद्यमशील क्रांति का उत्सव हर वर्ष राष्ट्रीय स्टार्टअप दिवस (16 जनवरी) के रूप में मनाया जाता है।

    प्रमुख उपलब्धियाँ

    इकोसिस्टम का विस्तार:
    2016 में लगभग 350 स्टार्टअप्स से बढ़कर आज 2.10 लाख से अधिक मान्यता प्राप्त स्टार्टअप्स हो चुके हैं।

    यूनिकॉर्न में उछाल:
    भारत में अब 120 से अधिक यूनिकॉर्न हैं, जिनका कुल मूल्य लगभग 350 अरब डॉलर है। इसके साथ ही भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम बन गया है।

    समावेशी विकास:
    टियर-II और टियर-III शहरों में स्टार्टअप्स की तेज़ वृद्धि हुई है और महिला नेतृत्व वाले उद्यमों की संख्या भी बढ़ी है।

    रोज़गार सृजन:
    स्टार्टअप्स ने टेक्नोलॉजी और नॉन-टेक्नोलॉजी दोनों क्षेत्रों में लाखों नौकरियाँ पैदा की हैं।

    नीतिगत सहयोग:
    DPIIT के नेतृत्व में टैक्स छूट, फंडिंग योजनाएँ, इनक्यूबेशन सुविधाएँ और सरलीकृत अनुपालन प्रक्रियाओं ने नवाचार को तेज़ी दी।


    10 वर्षों का प्रभाव (प्रमुख क्षेत्र)

    नवाचार:
    AI, फिनटेक, एडटेक, एग्रीटेक, हेल्थटेक जैसे क्षेत्रों को बड़ा प्रोत्साहन मिला।

    अर्थव्यवस्था:
    GDP में योगदान बढ़ा और वैश्विक निवेश में उल्लेखनीय वृद्धि हुई।

    वैश्विक पहचान:
    भारत एक अग्रणी स्टार्टअप शक्ति के रूप में स्थापित हुआ।

    सामाजिक प्रभाव:
    स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि और सस्टेनेबिलिटी से जुड़ी समस्याओं के समाधान सामने आए।


    भविष्य की दिशा

    अब यह पहल AI, डीप टेक, सस्टेनेबिलिटी पर केंद्रित है और विकसित भारत 2047 के दीर्घकालिक दृष्टिकोण के अनुरूप आगे बढ़ रही है।


    निष्कर्ष

    स्टार्टअप इंडिया के एक दशक ने एक बड़ी उद्यमशील क्रांति को जन्म दिया है, जिसने महानगरों से लेकर छोटे कस्बों तक अवसरों का लोकतंत्रीकरण किया। आने वाला दशक तकनीकी नेतृत्व, समावेशिता और वैश्विक प्रतिस्पर्धा को और मजबूत करने की दिशा में होगा।