UPI (यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस) ने 25 अगस्त 2026 को 10 वर्ष पूरे कर लिए हैं। इसने भारत के डिजिटल भुगतान पारिस्थितिकी तंत्र को बदल दिया है और यह दुनिया की सबसे बड़ी रियल-टाइम भुगतान प्रणाली बन गई है।
- शुरुआत: 25 अगस्त 2016 को RBI की निगरानी में NPCI द्वारा शुरू किया गया।
- लेनदेन में वृद्धि: 2016–17 में 1.78 करोड़ लेनदेन से बढ़कर 2025–26 में 24,162 करोड़ लेनदेन हो गए — लगभग 13,000 गुना वृद्धि।
- लेनदेन का मूल्य: ₹0.07 लाख करोड़ से बढ़कर ₹314 लाख करोड़ हो गया।
- जुलाई 2026: रिकॉर्ड 2,366 करोड़ लेनदेन, जिनका कुल मूल्य ₹29.88 लाख करोड़ रहा।
- UPI से जुड़े बैंक: संख्या 44 से बढ़कर 703 हो गई।
- वैश्विक पहचान: 2025 में वैश्विक रियल-टाइम भुगतान लेनदेन में UPI की हिस्सेदारी 49% रही।
- अंतरराष्ट्रीय पहुंच: UPI को सिंगापुर, UAE, फ्रांस, श्रीलंका, नेपाल और मॉरीशस सहित कई देशों में स्वीकार किया जाता है।
- प्रभाव: UPI ने वित्तीय समावेशन, कैशलेस भुगतान, डिजिटल नवाचार तथा सुविधाजनक P2P (व्यक्ति-से-व्यक्ति) और P2M (व्यक्ति-से-व्यापारी) लेनदेन को बढ़ावा दिया है।




