प्रधानमंत्री मोदी 11 से 12 मार्च, 2025 तक मॉरीशस की दो दिवसीय यात्रा पर रहेंगे

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 11 से 12 मार्च, 2025 तक मॉरीशस की दो दिवसीय राजकीय यात्रा पर जाने वाले हैं। यह यात्रा मॉरीशस के प्रधानमंत्री नवीन रामगुलाम के निमंत्रण पर हो रही है और मोदी 12 मार्च को मॉरीशस के राष्ट्रीय दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे।

अपनी यात्रा के दौरान, प्रधानमंत्री मोदी मॉरीशस के राष्ट्रपति से मुलाकात करेंगे और प्रधानमंत्री रामगुलाम के साथ व्यापक चर्चा करेंगे। यह यात्रा भारत और मॉरीशस के बीच घनिष्ठ और दीर्घकालिक संबंधों को रेखांकित करती है, जो साझा ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और लोगों से लोगों के बीच संबंधों पर आधारित है।

भारतीय रक्षा बलों की एक टुकड़ी और भारतीय नौसेना का एक जहाज भी राष्ट्रीय दिवस समारोह में भाग लेगा, जो दोनों देशों के बीच मजबूत रक्षा संबंधों को उजागर करेगा। इसके अतिरिक्त, मोदी सिविल सर्विस कॉलेज और क्षेत्रीय स्वास्थ्य केंद्र का उद्घाटन करेंगे, दोनों का निर्माण भारत की अनुदान सहायता से किया गया है।

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    दादासाहेब फाल्के पुरस्कार: मोहनलाल (भारतीय सिनेमा में उनके ऐतिहासिक योगदान के लिए)।

    श्रेष्ठ फ़ीचर फ़िल्म: 12th Fail (हिंदी)।

    श्रेष्ठ हिंदी फ़ीचर फ़िल्म: कथल: ए जैकफ्रूट मिस्ट्री।

    श्रेष्ठ अभिनेता: शाहरुख़ ख़ान (जवान) और विक्रांत मैसी (12th Fail)।

    श्रेष्ठ अभिनेत्री: रानी मुखर्जी (मिसेज चटर्जी वर्सेज नॉर्वे)।

    श्रेष्ठ निर्देशक: सुदीप्तो सेन (द केरल स्टोरी)।

    श्रेष्ठ लोकप्रिय फ़िल्म: रॉकी और रानी की प्रेम कहानी।

    श्रेष्ठ महिला पार्श्वगायिका: शिल्पा राव (जवान)।

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    विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) ने जनवरी 2026 में उच्च शिक्षा संस्थानों में जाति-आधारित भेदभाव को रोकने के लिए नए कानूनी रूप से बाध्यकारी दिशानिर्देश जारी किए हैं। इन नियमों को “उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने संबंधी विनियम, 2026” कहा गया है।
    ये नियम 2012 की पूर्व परामर्शात्मक (Advisory) व्यवस्था की जगह लेंगे और UGC से मान्यता प्राप्त सभी विश्वविद्यालयों एवं कॉलेजों पर अनिवार्य रूप से लागू होंगे


    📌 UGC के नए दिशानिर्देशों की मुख्य विशेषताएँ

    कानूनी ढांचा:
    2012 के दिशानिर्देशों के विपरीत, 2026 के नियम अनिवार्य एवं लागू करने योग्य हैं। इनके उल्लंघन पर दंड का प्रावधान है।

    भेदभाव की विस्तृत परिभाषा:
    इन नियमों में अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के छात्रों को स्पष्ट रूप से शामिल किया गया है, जिससे पहले OBC को बाहर रखने की कमी दूर हुई है।

    समान अवसर केंद्र (Equal Opportunity Centres – EOC):
    प्रत्येक संस्थान में EOC की स्थापना अनिवार्य होगी, जो शिकायतों का निपटारा, समावेशन को बढ़ावा और नियमों के अनुपालन की निगरानी करेगा।

    जवाबदेही:
    विश्वविद्यालयों के कुलपति, कॉलेज प्राचार्य और संस्थान प्रमुख समानता सुनिश्चित करने और भेदभाव रोकने के लिए सीधे तौर पर जिम्मेदार होंगे।

    शिकायत निवारण तंत्र:
    प्रवेश, छात्रावास, कक्षा और शिक्षकों के साथ व्यवहार से जुड़ी जाति-आधारित शिकायतों के लिए अलग शिकायत तंत्र स्थापित करना अनिवार्य होगा।

    दंडात्मक प्रावधान:
    नियमों का पालन न करने पर वित्तीय दंड, मान्यता रद्द होना या अन्य अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है।


    🏛 शैक्षणिक परिसरों पर प्रभाव

    छात्र:
    हाशिए पर रहे वर्गों को अधिक सुरक्षा मिलेगी और शिक्षा, छात्रावास व सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों में सम्मान और समान अवसर सुनिश्चित होंगे।

    शिक्षक एवं कर्मचारी:
    भेदभाव रोकने हेतु संवेदनशीलता प्रशिक्षण (Sensitization Programs) अनिवार्य होंगे।

    संस्थान:
    जागरूकता अभियान, शिकायत रिपोर्टिंग प्रणाली और समावेशन की नियमित ऑडिट जैसे सक्रिय उपाय अपनाने होंगे।


    📊 तुलना: पुराने और नए दिशानिर्देश

    पहलू2012 के दिशानिर्देश2026 के दिशानिर्देश
    प्रकृतिकेवल परामर्शात्मककानूनी रूप से बाध्यकारी
    कवरेजकेवल SC/ST छात्रSC, ST, OBC छात्र
    अनुपालनस्वैच्छिकअनिवार्य, दंड सहित
    शिकायत तंत्रसामान्य निवारणजाति-आधारित समर्पित तंत्र
    संस्थागत भूमिकासमानता को प्रोत्साहनEOC अनिवार्य

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    चेन्नई पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (CPCL) में समापन समारोह में कार्यस्थल सुरक्षा के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के उपयोग पर ध्यान केंद्रित किया गया। इस कार्यक्रम ने सुरक्षित और स्वस्थ वातावरण सुनिश्चित करने की सामूहिक जिम्मेदारी को मजबूत किया।

  • स्टार्टअप इंडिया – 10-साल की समरी (2016–2026)

    स्टार्टअप इंडिया की शुरुआत 16 जनवरी 2016 को हुई थी और इसने भारत को एक प्रमुख वैश्विक स्टार्टअप हब में बदलते हुए एक दशक पूरा कर लिया है। इस पहल ने भारत को नौकरी खोजने वाले देश से नौकरी देने वाला देश बनाने में अहम भूमिका निभाई। इसी उद्यमशील क्रांति का उत्सव हर वर्ष राष्ट्रीय स्टार्टअप दिवस (16 जनवरी) के रूप में मनाया जाता है।

    प्रमुख उपलब्धियाँ

    इकोसिस्टम का विस्तार:
    2016 में लगभग 350 स्टार्टअप्स से बढ़कर आज 2.10 लाख से अधिक मान्यता प्राप्त स्टार्टअप्स हो चुके हैं।

    यूनिकॉर्न में उछाल:
    भारत में अब 120 से अधिक यूनिकॉर्न हैं, जिनका कुल मूल्य लगभग 350 अरब डॉलर है। इसके साथ ही भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम बन गया है।

    समावेशी विकास:
    टियर-II और टियर-III शहरों में स्टार्टअप्स की तेज़ वृद्धि हुई है और महिला नेतृत्व वाले उद्यमों की संख्या भी बढ़ी है।

    रोज़गार सृजन:
    स्टार्टअप्स ने टेक्नोलॉजी और नॉन-टेक्नोलॉजी दोनों क्षेत्रों में लाखों नौकरियाँ पैदा की हैं।

    नीतिगत सहयोग:
    DPIIT के नेतृत्व में टैक्स छूट, फंडिंग योजनाएँ, इनक्यूबेशन सुविधाएँ और सरलीकृत अनुपालन प्रक्रियाओं ने नवाचार को तेज़ी दी।


    10 वर्षों का प्रभाव (प्रमुख क्षेत्र)

    नवाचार:
    AI, फिनटेक, एडटेक, एग्रीटेक, हेल्थटेक जैसे क्षेत्रों को बड़ा प्रोत्साहन मिला।

    अर्थव्यवस्था:
    GDP में योगदान बढ़ा और वैश्विक निवेश में उल्लेखनीय वृद्धि हुई।

    वैश्विक पहचान:
    भारत एक अग्रणी स्टार्टअप शक्ति के रूप में स्थापित हुआ।

    सामाजिक प्रभाव:
    स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि और सस्टेनेबिलिटी से जुड़ी समस्याओं के समाधान सामने आए।


    भविष्य की दिशा

    अब यह पहल AI, डीप टेक, सस्टेनेबिलिटी पर केंद्रित है और विकसित भारत 2047 के दीर्घकालिक दृष्टिकोण के अनुरूप आगे बढ़ रही है।


    निष्कर्ष

    स्टार्टअप इंडिया के एक दशक ने एक बड़ी उद्यमशील क्रांति को जन्म दिया है, जिसने महानगरों से लेकर छोटे कस्बों तक अवसरों का लोकतंत्रीकरण किया। आने वाला दशक तकनीकी नेतृत्व, समावेशिता और वैश्विक प्रतिस्पर्धा को और मजबूत करने की दिशा में होगा।