उत्तर प्रदेश के बलिया में स्थित सुरहा ताल (जय प्रकाश नारायण पक्षी अभयारण्य) को 5 जून, 2026 को आधिकारिक तौर पर भारत का 100वां रामसर स्थल घोषित किया गया है, जो आर्द्रभूमि संरक्षण में एक ऐतिहासिक उपलब्धि है। 3,400 हेक्टेयर में फैली यह आर्द्रभूमि पक्षियों की विविधता से भरपूर है, प्रवासी पक्षियों को आश्रय देती है, भूजल को रिचार्ज करती है और जलवायु परिवर्तन का सामना करने की क्षमता को मजबूत करती है।
🌿 सुरहा ताल के रामसर स्थल बनने की मुख्य बातें
- स्थान: बलिया जिला, उत्तर प्रदेश
- आधिकारिक नाम: जय प्रकाश नारायण पक्षी अभयारण्य (जिसे आमतौर पर सुरहा ताल के नाम से जाना जाता है)
- क्षेत्रफल: ~3,400 हेक्टेयर
- घोषणा: विश्व पर्यावरण दिवस (5 जून, 2026) पर भारत का 100वां रामसर स्थल
- पारिस्थितिक महत्व:
- प्रवासी और स्थानीय पक्षियों का आवास
- स्थानीय सिंचाई और भूजल रिचार्ज में सहायक
- बाढ़ और सूखे के खिलाफ सुरक्षा कवच (बफर) का काम करता है
- जलवायु परिवर्तन का सामना करने की क्षमता और जैव विविधता संरक्षण को बढ़ाता है
📖 रामसर स्थल क्या है?
- परिभाषा: रामसर कन्वेंशन (1971, ईरान) के तहत मान्यता प्राप्त अंतरराष्ट्रीय महत्व वाली आर्द्रभूमि।
- भारत की सदस्यता: 1982 में शामिल हुआ; अब विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 100 रामसर स्थल हैं।
- वैश्विक संदर्भ: यूके 176 स्थलों के साथ सबसे आगे है; भारत दुनिया के शीर्ष तीन देशों में शामिल है।
- रामसर आर्द्रभूमि के कार्य:
- बाढ़ नियंत्रण और जल शोधन
- कार्बन भंडारण और जलवायु विनियमन
- लुप्तप्राय प्रजातियों का आवास
- स्थानीय समुदायों की आजीविका में सहायता
📊 भारत में पहला रामसर स्थल – चिल्का झील (ओडिशा) और केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान (राजस्थान)




