स्टार्टअप इंडिया की शुरुआत 16 जनवरी 2016 को हुई थी और इसने भारत को एक प्रमुख वैश्विक स्टार्टअप हब में बदलते हुए एक दशक पूरा कर लिया है। इस पहल ने भारत को नौकरी खोजने वाले देश से नौकरी देने वाला देश बनाने में अहम भूमिका निभाई। इसी उद्यमशील क्रांति का उत्सव हर वर्ष राष्ट्रीय स्टार्टअप दिवस (16 जनवरी) के रूप में मनाया जाता है।
प्रमुख उपलब्धियाँ
इकोसिस्टम का विस्तार:
2016 में लगभग 350 स्टार्टअप्स से बढ़कर आज 2.10 लाख से अधिक मान्यता प्राप्त स्टार्टअप्स हो चुके हैं।
यूनिकॉर्न में उछाल:
भारत में अब 120 से अधिक यूनिकॉर्न हैं, जिनका कुल मूल्य लगभग 350 अरब डॉलर है। इसके साथ ही भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम बन गया है।
समावेशी विकास:
टियर-II और टियर-III शहरों में स्टार्टअप्स की तेज़ वृद्धि हुई है और महिला नेतृत्व वाले उद्यमों की संख्या भी बढ़ी है।
रोज़गार सृजन:
स्टार्टअप्स ने टेक्नोलॉजी और नॉन-टेक्नोलॉजी दोनों क्षेत्रों में लाखों नौकरियाँ पैदा की हैं।
नीतिगत सहयोग:
DPIIT के नेतृत्व में टैक्स छूट, फंडिंग योजनाएँ, इनक्यूबेशन सुविधाएँ और सरलीकृत अनुपालन प्रक्रियाओं ने नवाचार को तेज़ी दी।
10 वर्षों का प्रभाव (प्रमुख क्षेत्र)
नवाचार:
AI, फिनटेक, एडटेक, एग्रीटेक, हेल्थटेक जैसे क्षेत्रों को बड़ा प्रोत्साहन मिला।
अर्थव्यवस्था:
GDP में योगदान बढ़ा और वैश्विक निवेश में उल्लेखनीय वृद्धि हुई।
वैश्विक पहचान:
भारत एक अग्रणी स्टार्टअप शक्ति के रूप में स्थापित हुआ।
सामाजिक प्रभाव:
स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि और सस्टेनेबिलिटी से जुड़ी समस्याओं के समाधान सामने आए।
भविष्य की दिशा
अब यह पहल AI, डीप टेक, सस्टेनेबिलिटी पर केंद्रित है और विकसित भारत 2047 के दीर्घकालिक दृष्टिकोण के अनुरूप आगे बढ़ रही है।
निष्कर्ष
स्टार्टअप इंडिया के एक दशक ने एक बड़ी उद्यमशील क्रांति को जन्म दिया है, जिसने महानगरों से लेकर छोटे कस्बों तक अवसरों का लोकतंत्रीकरण किया। आने वाला दशक तकनीकी नेतृत्व, समावेशिता और वैश्विक प्रतिस्पर्धा को और मजबूत करने की दिशा में होगा।
