पारसी नव वर्ष, या नवरोज़, शनिवार, 21 मार्च 2026 को मनाया गया। यह दिन वसंत विषुव का प्रतीक है और नवीनीकरण, समृद्धि और नई शुरुआत का संकेत देता है। भारत में, विशेष रूप से मुंबई और गुजरात में, पारसी समुदाय ने इस त्योहार को प्रार्थनाओं, विशेष भोज और सांस्कृतिक समारोहों के साथ मनाया।
नवरोज़ का महत्व
नवरोज़ का अर्थ है “नया दिन” (फ़ारसी शब्द ‘नव’ – नया, और ‘रोज़’ – दिन से)। इसकी जड़ें पारसी धर्म की परंपराओं में गहरी हैं और इसे 3,000 से भी अधिक वर्षों से मनाया जा रहा है। यह ईरानी कैलेंडर वर्ष की शुरुआत का प्रतीक है और इसे वैश्विक स्तर पर मान्यता प्राप्त है; यहाँ तक कि संयुक्त राष्ट्र भी इसे ‘अंतर्राष्ट्रीय नवरोज़ दिवस’ के रूप में मान्यता देता है।
