भारत के ह्यूमन स्पेसफ्लाइट प्रोग्राम, गगनयान ने अपने ड्रोग पैराशूट सिस्टम के सफल क्वालिफिकेशन-लेवल लोड टेस्ट के साथ एक अहम मुकाम हासिल किया। यह टेस्ट डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गनाइजेशन (DRDO) ने 18 फरवरी 2026 को चंडीगढ़ में टर्मिनल बैलिस्टिक्स रिसर्च लेबोरेटरी (TBRL) की रेल ट्रैक रॉकेट स्लेज (RTRS) फैसिलिटी में किया था।
खास बातें
- ड्रोग पैराशूट क्रू मॉड्यूल के डीसेलरेशन सिस्टम का एक ज़रूरी हिस्सा है, जिसे मुख्य पैराशूट के डिप्लॉयमेंट से पहले स्पेसक्राफ्ट को स्टेबल और धीमा करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
- क्वालिफिकेशन-लेवल लोड टेस्ट ने बहुत ज़्यादा एयरोडायनामिक कंडीशन में पैराशूट की ताकत, भरोसे और परफॉर्मेंस को वैलिडेट किया।
- रक्षा मंत्रालय ने इस बात पर ज़ोर दिया कि RTRS फैसिलिटी एक खास डायनामिक टेस्ट सेंटर है जिसका इस्तेमाल बड़े पैमाने पर हाई-स्पीड एयरोडायनामिक और बैलिस्टिक इवैल्यूएशन के लिए किया जाता है।
- यह सफल ट्रायल हाई-स्ट्रेंथ रिबन पैराशूट को डिजाइन करने और बनाने में भारत की बढ़ती एक्सपर्टीज़ को दिखाता है, यह टेक्नोलॉजी री-एंट्री और लैंडिंग के दौरान एस्ट्रोनॉट की सेफ्टी के लिए बहुत ज़रूरी है।
- इस टेस्ट की देखरेख DRDO और ISRO की टीमों ने मिलकर की, जो भारत के पहले ह्यूमन स्पेसफ्लाइट मिशन की सुरक्षा और सफलता पक्का करने की दिशा में एक और कदम है।
