सोमनाथ स्वाभिमान पर्व: लचीलेपन की एक सहस्राब्दी (1026-2026)

सोमनाथ का इतिहास: “विनाश पर निर्माण” की अमर गाथा

सोमनाथ मंदिर का इतिहास बार-बार टूटने और हर बार और अधिक भव्य रूप में खड़े होने की कहानी है।

सोमनाथ मंदिर का ऐतिहासिक कालक्रम

काल / वर्षघटना
प्राचीन कालऋग्वेद और पुराणों में उल्लेख; 12 ज्योतिर्लिंगों में प्रथम के रूप में पूज्य
1026 ई.महमूद ग़ज़नी द्वारा पहला बड़ा आक्रमण और लूट
1297–1706अलाउद्दीन खिलजी, ज़फ़र ख़ान और अंततः औरंगज़ेब द्वारा बार-बार ध्वंस
1947–1951स्वतंत्रता के बाद पुनर्निर्माण की शुरुआत – सरदार वल्लभभाई पटेल और के.एम. मुंशी के नेतृत्व में
11 मई 1951भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेन्द्र प्रसाद द्वारा प्राण-प्रतिष्ठा
2026सोमनाथ स्वाभिमान पर्व – पहले आक्रमण के 1000 वर्ष और पुनर्प्राण-प्रतिष्ठा के 75 वर्ष पूर्ण

वास्तुकला एवं वैज्ञानिक अद्भुतताएँ

1. बाणस्तंभ (Arrow Pillar)

सोमनाथ स्वाभिमान पर्व का प्रमुख आकर्षण मंदिर के समुद्र की ओर स्थित बाणस्तंभ है।

बाणस्तंभ पर अंकित संस्कृत लेख

संस्कृत वाक्यअर्थ
“आसमुद्रांत दक्षिण ध्रुव पर्यंत अबाधित ज्योतिर्मार्ग”इस बिंदु से लेकर दक्षिण ध्रुव (अंटार्कटिका) तक सीधी रेखा में कोई भूमि नहीं है

➡️ यह प्राचीन भारतीय विद्वानों के उन्नत भौगोलिक और समुद्री ज्ञान को दर्शाता है।


2. कैलास महामेरु प्रसाद शैली

वर्तमान सोमनाथ मंदिर का निर्माण चौलुक्य (सोलंकी) स्थापत्य शैली में किया गया है, जो नागर स्थापत्य शैली की एक उपशैली है।

मुख्य वास्तु विशेषताएँ

विशेषताविवरण
स्थापत्य शैलीचौलुक्य (सोलंकी)
शिखर की ऊँचाईलगभग 155 फीट
प्रमुख संरचनाएँगर्भगृह, सभा मंडप, नृत्य मंडप
शिल्पकलाअत्यंत सूक्ष्म और भव्य नक्काशी

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